
नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने शांतिपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठानों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि ऐसे परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले नहीं होने चाहिए और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल के अधिकार की रक्षा करनी चाहिए।
पेजेश्कियान ने शांतिपूर्ण परमाणु गतिविधियों और नागरिक बुनियादी ढांचे को सैन्य संघर्ष से बचाने की जरूरत पर जोर दिया। उनका बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ा हुआ है और ईरान से जुड़े परमाणु प्रतिष्ठानों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चिंताएं बनी हुई हैं।
ईरानी राष्ट्रपति ने BRICS की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने समूह से वैश्विक स्तर पर न्याय, शांति और संतुलन की आवाज को मजबूत करने की अपील की। उनका कहना था कि BRICS देशों के पास अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में अधिक प्रभावी भूमिका निभाने की क्षमता है।
BRICS के नई दिल्ली घोषणापत्र में भी शांतिपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई है। घोषणापत्र में कहा गया कि IAEA के पूर्ण सुरक्षा उपायों के तहत आने वाले शांतिपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठानों पर जानबूझकर हमले अंतरराष्ट्रीय कानून और IAEA से जुड़े प्रासंगिक प्रस्तावों के खिलाफ हैं। साथ ही परमाणु सुरक्षा और सेफगार्ड्स को हर परिस्थिति में बनाए रखने की जरूरत बताई गई।
पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर BRICS देशों ने भी गंभीर चिंता व्यक्त की है। नई दिल्ली घोषणापत्र में सदस्य देशों ने अधिकतम संयम बरतने और ऐसे कदमों से बचने की अपील की, जिनसे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है। विवादों के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया गया।
BRICS समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के बीच भी द्विपक्षीय मुलाकात हुई। भारत ने पश्चिम एशिया में मौजूदा घटनाक्रम पर चर्चा करते हुए दोहराया कि सभी मुद्दों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए होना चाहिए। पीएम मोदी ने क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता के साथ समुद्री मार्गों, व्यापार और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत पर भी जोर दिया।
BRICS घोषणा में नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। समूह ने पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और दीर्घकालिक शांति के लिए संवाद एवं कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाने की अपील की। इसके साथ ही वैश्विक व्यापार, सप्लाई चेन और ऊर्जा प्रवाह को सुचारु बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
कुल मिलाकर, BRICS समिट में पेजेश्कियान का बयान ईरान के परमाणु कार्यक्रम और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं, नई दिल्ली घोषणापत्र में शांतिपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठानों की सुरक्षा पर चिंता व्यक्त किया जाना इस मुद्दे को व्यापक BRICS मंच पर भी जगह देता है।



