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अमेरिका-चीन संबंधों पर संकट: रक्षा मंत्रियों की बैठक के बाद अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ का बड़ा बयान

अमेरिका और चीन के बीच चल रहा तनाव एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। हाल ही में अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ और चीन के रक्षा मंत्री के बीच हुई बैठक के बाद दोनों देशों के संबंधों में ठंडक और गहराई से महसूस की जा रही दूरी फिर उजागर हुई। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में पीट हेगसेथ ने कहा, “अमेरिका और चीन के रिश्ते शायद कभी बेहतर नहीं होंगे, क्योंकि हमारी प्राथमिकताएँ और दृष्टिकोण पूरी तरह अलग हैं।”

यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका लगातार ताइवान, दक्षिण चीन सागर और मानवाधिकार मुद्दों पर चीन की नीतियों की आलोचना करता रहा है। वहीं चीन इसे अमेरिका का “हस्तक्षेपकारी रवैया” बताता है और अपने आंतरिक मामलों में दखल न देने की चेतावनी देता है।

सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में साइबर सुरक्षा, दक्षिण चीन सागर में नौसेना की गतिविधियों और ताइवान को लेकर बढ़ते तनाव जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। हालांकि किसी ठोस नतीजे पर दोनों पक्ष नहीं पहुँच सके। अमेरिकी पक्ष ने यह स्पष्ट कर दिया कि चीन के साथ सहयोग तभी संभव है जब वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों और मानवीय मूल्यों का सम्मान करे।

विशेषज्ञों का मानना है कि हेगसेथ का यह बयान अमेरिका की नई सुरक्षा नीति को दर्शाता है, जिसमें चीन को ‘मुख्य रणनीतिक चुनौती’ के रूप में देखा जा रहा है। वहीं चीन की ओर से यह कहा गया कि अमेरिका अपनी ‘ठंड युद्ध मानसिकता’ से बाहर निकले और आपसी सम्मान के आधार पर संबंधों को आगे बढ़ाए।

कुल मिलाकर, यह बैठक यह संकेत देती है कि अमेरिका-चीन संबंधों में निकट भविष्य में सुधार की संभावना बेहद कम है। वैश्विक राजनीति में दोनों देशों के बीच यह खींचतान न सिर्फ एशिया बल्कि पूरी दुनिया की शक्ति संतुलन व्यवस्था को प्रभावित कर रही है। दोनों देशों के बीच बढ़ता अविश्वास आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।

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