
चीन और ताइवान के बीच बढ़ता तनाव एक बार फिर दुनिया की नजरों में है। ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी है कि चीन ने हाल ही में ताइवान के आसपास अपनी सैन्य गतिविधियों को तेज कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, बीते 24 घंटों में चीन के 8 युद्धपोत और 5 लड़ाकू विमान ताइवान की वायु एवं समुद्री सीमा के करीब देखे गए। ताइवान ने इन गतिविधियों को घुसपैठ की कोशिश करार देते हुए अपने रक्षा तंत्र को हाई अलर्ट पर रखा है।
ताइवान की सेना का कहना है कि उन्होंने तुरंत निगरानी बढ़ा दी है और चीनी विमानों की हरकतों पर सटीक नजर रखी जा रही है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब ताइवान में चुनावी तैयारियां जारी हैं और अमेरिका ने भी ताइवान को लेकर चीन को चेतावनी दी है कि वह किसी भी प्रकार की आक्रामक कार्रवाई से बचे।
विश्लेषकों का मानना है कि चीन की यह सैन्य सक्रियता ताइवान पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। चीन लंबे समय से ताइवान को अपने “अभिन्न अंग” के रूप में दावा करता आया है, जबकि ताइवान खुद को एक स्वतंत्र लोकतांत्रिक राष्ट्र मानता है। हाल के महीनों में चीन ने ताइवान के पास सैन्य अभ्यासों में बढ़ोतरी की है, जिससे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती जा रही है।
ताइवान ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी प्रकार की सैन्य धमकी से पीछे नहीं हटेगा और अपनी संप्रभुता एवं लोकतंत्र की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। वहीं, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश भी ताइवान की सुरक्षा को लेकर लगातार समर्थन जताते आ रहे हैं।
यह घटना एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन को और अधिक जटिल बना रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ऐसी घटनाएं जारी रहीं तो आने वाले समय में यह विवाद वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। चीन की इस नई घुसपैठ की कोशिश ने एक बार फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या इंडो-पैसिफिक में नया शक्ति संघर्ष शुरू हो चुका है।



