एक मासूम की जान चली गई, लेकिन बिजली विभाग की नींद अब भी नहीं टूटी। क्षेत्र में खुले में रखे ट्रांसफॉर्मर, कटे और लटकते तार, और टूटी हुई बैरिकेडिंग आज भी किसी और जानलेवा हादसे को आमंत्रण दे रही हैं। यह घटना न केवल एक प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण है, बल्कि यह हमारे सिस्टम की संवेदनहीनता को भी उजागर करती है।
घटना तब हुई जब एक 8 वर्षीय बच्चा खेलते-खेलते खुले पड़े ट्रांसफॉर्मर के पास चला गया। वहां कटे हुए तार से उसे करंट लगा और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस ट्रांसफॉर्मर की बैरिकेडिंग महीनों पहले टूट गई थी और बार-बार शिकायत करने के बावजूद बिजली विभाग ने कोई सुध नहीं ली। हादसे के बाद भी उस जगह की हालत जस की तस बनी हुई है।
लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। उन्होंने कहा कि विभाग तब तक जागता नहीं जब तक कोई जान ना जाए। ट्रांसफॉर्मर के आसपास कोई चेतावनी बोर्ड नहीं, कोई सुरक्षा इंतजाम नहीं, और तार इतने नीचे लटके हैं कि कोई भी बच्चा या जानवर कभी भी संपर्क में आ सकता है।
बिजली विभाग की तरफ से कोई ठोस जवाब नहीं आया है, सिर्फ इतना कहा गया कि “जांच की जा रही है।” सवाल यह है कि जांच तब क्यों, जब पहले से बार-बार सूचना दी जा चुकी थी? और क्या अब किसी और की जान जाने तक इंतजार किया जाएगा?
मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। लोगों ने मांग की है कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और पूरे क्षेत्र में बिजली उपकरणों की सुरक्षा का तुरंत निरीक्षण किया जाए।
यह सिर्फ एक हादसा नहीं, सिस्टम की मौत है। जब एक बच्चा अपनी जान से हाथ धो बैठता है, और फिर भी कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं होता, तो यह लोकतंत्र की गंभीर विफलता को दर्शाता है।
सरकार और संबंधित विभागों को चाहिए कि इस हादसे को चेतावनी के रूप में लें। सभी खुले ट्रांसफॉर्मरों को सुरक्षित किया जाए, बैरिकेडिंग तुरंत दुरुस्त की जाए, और लटकते तारों को तत्काल हटाया जाए। अगर अब भी कदम नहीं उठाए गए, तो अगली खबर फिर किसी और मासूम की मौत बन सकती है।



