
2001 में भारतीय संसद भवन पर हुए आतंकवादी हमले के बाद, भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध की स्थिति बन गई थी। यह दावा पूर्व अमेरिकी सीआईए एजेंट जॉन किरियाकू ने किया है। उन्होंने कहा कि भारत ने संयम दिखाया, जिससे युद्ध टला।
किरियाकू के अनुसार, अमेरिका ने पाकिस्तान के परमाणु हथियारों तक अप्रत्यक्ष पहुंच प्राप्त की थी, और पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के जनक अब्दुल कदीर खान को खत्म करने की योजना बनाई थी। हालांकि, सऊदी अरब के हस्तक्षेप के कारण यह संभव नहीं हो पाया। उन्होंने यह भी कहा कि 2002 और 2008 में भारत पर हुए आतंकी हमलों के बाद अमेरिकी प्रशासन भारत से जवाबी कार्रवाई की उम्मीद कर रहा था, लेकिन भारत ने संयम बरता।
भारत ने संसद हमले के बाद पाकिस्तान से जवाबी कार्रवाई की योजना बनाई थी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव और कूटनीतिक प्रयासों के कारण युद्ध टल गया। अमेरिका ने पाकिस्तान को चेतावनी दी थी कि अगर उसने भारत पर हमला किया, तो परिणाम गंभीर होंगे।
भारत ने संसद हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कूटनीतिक और सैन्य कदम उठाए। “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत, भारत ने पाकिस्तान द्वारा पिछले 25 वर्षों में किए गए आतंकवादी गतिविधियों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने उजागर किया। इस अभियान का उद्देश्य पाकिस्तान पर दबाव बनाना और उसे आतंकवाद के खिलाफ जिम्मेदार ठहराना था।
किरियाकू के खुलासे से यह स्पष्ट होता है कि 2001 के संसद हमले के बाद, भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध की स्थिति गंभीर थी। हालांकि, भारत की संयमित कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय समर्थन से युद्ध टल गया, जिससे क्षेत्रीय शांति बनी रही।



