
Budget 2026 में सरकार ने शेयर बायबैक पर टैक्स लगाने के तरीके में बड़ा बदलाव करते हुए निवेशकों और कंपनियों, दोनों के लिए नई तस्वीर पेश की है। अब तक शेयर बायबैक पर कंपनियों को डिस्ट्रीब्यूटेड टैक्स चुकाना पड़ता था, जबकि निवेशकों के हाथ में मिलने वाली रकम काफी हद तक टैक्स-फ्री मानी जाती थी। लेकिन नए बजट प्रावधानों के तहत सरकार ने इस सिस्टम को बदलते हुए टैक्स का बोझ सीधे निवेशकों पर डालने का फैसला किया है। अब शेयर बायबैक से मिलने वाली आय को कैपिटल गेन की तरह ट्रीट किया जाएगा और उसी हिसाब से उस पर टैक्स लगाया जाएगा। इसका सीधा असर छोटे निवेशकों पर पड़ेगा, जो अब तक बायबैक को टैक्स एफिशिएंट विकल्प मानते थे। छोटे निवेशकों के लिए इसका मतलब है कि अगर उन्होंने कम अवधि में शेयर खरीदे हैं और कंपनी बायबैक लाती है, तो उन्हें शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ सकता है, जबकि लंबे समय के निवेशकों पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लागू होगा। इससे रिटर्न थोड़ा कम हो सकता है और निवेश की योजना बनाते समय टैक्स फैक्टर को ज्यादा ध्यान में रखना पड़ेगा। वहीं प्रमोटर्स और बड़े निवेशकों के लिए यह बदलाव दोधारी तलवार साबित हो सकता है। एक तरफ उन्हें टैक्स चुकाना होगा, लेकिन दूसरी तरफ कंपनियों पर लगने वाला अतिरिक्त टैक्स हटने से बायबैक के फैसले आसान हो सकते हैं। सरकार का मानना है कि इससे टैक्स सिस्टम ज्यादा पारदर्शी बनेगा और डिविडेंड व बायबैक के बीच टैक्स ट्रीटमेंट में समानता आएगी। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अल्पकाल में शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि निवेशक अपनी रणनीति दोबारा तय करेंगे। कुल मिलाकर Budget 2026 का यह कदम टैक्स सुधार की दिशा में बड़ा माना जा रहा है, लेकिन छोटे निवेशकों को अब पहले से ज्यादा सतर्क होकर निवेश के फैसले लेने होंगे और प्रमोटर्स को भी अपनी पूंजी संरचना और रिटर्न प्लानिंग नए सिरे से करनी पड़ेगी।



