
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध ने वैश्विक हवाई यातायात को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है, जिसका सीधा असर भारत पर भी देखने को मिल रहा है। पश्चिम एशिया के कई देशों के एयरस्पेस आंशिक या पूर्ण रूप से बंद होने के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के रूट बदलने पड़े हैं। इससे उड़ानों की दूरी बढ़ गई है, ईंधन खर्च में इजाफा हुआ है और ऑपरेशनल लागत कई गुना बढ़ गई है। नतीजतन भारत से खाड़ी देशों, यूरोप और अमेरिका के लिए उड़ानों का किराया अचानक काफी महंगा हो गया है। कई रूटों पर टिकट कीमतें सामान्य से दो से तीन गुना तक बढ़ चुकी हैं। यात्रा एजेंसियों के अनुसार दुबई, दोहा, अबू धाबी और रियाद जैसे प्रमुख गंतव्यों के लिए टिकटों की मांग तो बनी हुई है, लेकिन सीमित उड़ानों और सुरक्षा कारणों से 700 से ज्यादा फ्लाइट्स रद्द करनी पड़ी हैं।
एयरलाइंस कंपनियां वैकल्पिक मार्गों से उड़ानें संचालित कर रही हैं, जिससे उड़ान अवधि में 2 से 4 घंटे तक की बढ़ोतरी हो रही है। इसका असर न केवल यात्रियों की जेब पर पड़ रहा है, बल्कि कार्गो सेवाओं और निर्यात-आयात पर भी दिखाई दे रहा है। भारत में काम करने वाले लाखों प्रवासी श्रमिक, छात्र और कारोबारी इस स्थिति से परेशान हैं। ट्रैवल इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक क्षेत्र में स्थिरता नहीं आती, तब तक किराए सामान्य स्तर पर लौटना मुश्किल है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय स्थिति पर नजर बनाए हुए है और यात्रियों से आधिकारिक सूचना के आधार पर ही यात्रा की योजना बनाने की अपील की है। फिलहाल सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, लेकिन मिडिल ईस्ट संकट ने यह साफ कर दिया है कि वैश्विक तनाव का असर भारतीय हवाई सेवाओं पर तुरंत और गहराई से पड़ता है।



