
भारत परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए कहा कि देश ने न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी, ईंधन प्रबंधन और रिएक्टर निर्माण में महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने बताया कि सरकार की नीतियों का उद्देश्य आयात पर निर्भरता घटाना और स्वदेशी अनुसंधान व निर्माण को बढ़ावा देना है, ताकि ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सके और भविष्य की जरूरतों को देश अपने दम पर पूरा कर पाए।
मंत्री ने कहा कि भारत ने पिछले वर्षों में कई स्वदेशी रिएक्टर विकसित किए हैं और न्यूक्लियर पावर उत्पादन की क्षमता लगातार बढ़ रही है। वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की मेहनत से देश अब उन्नत तकनीकों के विकास में सक्षम हो रहा है। इससे न केवल ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि उच्च कौशल वाले रोजगार भी पैदा होंगे। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि परमाणु ऊर्जा स्वच्छ और भरोसेमंद स्रोत है, जो कार्बन उत्सर्जन कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
सरकार निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के सहयोग से इस सेक्टर में निवेश बढ़ाने पर भी जोर दे रही है। रिसर्च संस्थानों को आधुनिक सुविधाएं दी जा रही हैं और युवाओं को न्यूक्लियर साइंस में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। मंत्री के अनुसार, आत्मनिर्भरता का मतलब सिर्फ उपकरण बनाना नहीं, बल्कि डिजाइन, सुरक्षा मानकों और संचालन क्षमता में भी वैश्विक स्तर की दक्षता हासिल करना है।
उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी परियोजनाएं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप संचालित की जाती हैं और नियमित निगरानी की व्यवस्था मौजूद है। भारत का लक्ष्य है कि बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करते हुए टिकाऊ विकास सुनिश्चित किया जाए।



