
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर अपने दो दिवसीय मॉस्को दौरे पर रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात करेंगे। यह बैठक भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक और राजनीतिक सहयोग को और मजबूत करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों, बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनज़र दोनों देशों के बीच यह चर्चा बेहद अहम होगी।
इस मुलाकात में राजनीतिक सहयोग के साथ-साथ रक्षा साझेदारी, ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग, व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने, वैश्विक मुद्दों पर समन्वय और बहुपक्षीय मंचों पर साझेदारी बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है। रूस भारत का दशकों पुराना सामरिक साझेदार रहा है, और दोनों देशों के बीच रक्षा तकनीक, सैन्य सहयोग और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में गहरा संबंध है।
हाल के वर्षों में, जब वैश्विक स्तर पर नए गठजोड़ बन रहे हैं, भारत और रूस अपने पारंपरिक संबंधों को नई दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जयशंकर और लावरोव के बीच यह मुलाकात ऊर्जा सुरक्षा पर भी केंद्रित हो सकती है, क्योंकि रूस भारत के लिए कच्चे तेल का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। इसके अलावा, दोनों देश परमाणु ऊर्जा, खनन, रेलवे विकास और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग को और बढ़ाने की दिशा में चर्चा कर सकते हैं।
यूक्रेन संकट के दौरान भारत ने एक संतुलित कूटनीति अपनाई है, और रूस के साथ अपने संबंधों को व्यावहारिक और रणनीतिक रूप से आगे बढ़ाया है। ऐसी स्थिति में यह बैठक यह संदेश देगी कि भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को बरकरार रखते हुए बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में अपनी भूमिका को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
दोनों देशों के बीच अफगानिस्तान की स्थिति, एशिया क्षेत्र में सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और संयुक्त राष्ट्र सुधार जैसे मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं।
कुल मिलाकर, मॉस्को में होने वाली यह मुलाकात भारत-रूस द्विपक्षीय संबंधों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ सकती है। यह बैठक दोनों देशों के बीच राजनीतिक विश्वास को और बढ़ाएगी, साथ ही क्षेत्रीय व वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए एक मजबूत साझेदारी का मार्ग प्रशस्त करेगी।



