रूस और पश्चिमी टेक कंपनियों के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। इस बार निशाने पर है मेटा (Meta) का मैसेजिंग ऐप ‘वाट्सएप’, जिसे रूस के एक वरिष्ठ सांसद ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है। रूसी संसद (डूमा) के प्रभावशाली सदस्य ने हाल ही में एक बयान में कहा कि मेटा को अब “रूस छोड़ने की तैयारी करनी चाहिए” क्योंकि उसकी सेवाएं देश की डिजिटल संप्रभुता और साइबर सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुकी हैं।
सांसद के अनुसार, वाट्सएप का डेटा ट्रांसफर और एन्क्रिप्शन सिस्टम रूस के नियमों के अनुकूल नहीं है और इसका दुरुपयोग विदेशी एजेंसियों द्वारा जासूसी व निगरानी के लिए किया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मेटा ने पहले भी कई बार रूसी कानूनों का उल्लंघन किया है और अब समय आ गया है कि रूस अपनी डिजिटल सीमाओं को सख्ती से लागू करे।
यह बयान ऐसे समय आया है जब रूस पहले ही कई पश्चिमी टेक कंपनियों पर प्रतिबंध लगा चुका है, जिनमें फेसबुक और इंस्टाग्राम (दोनों मेटा के स्वामित्व वाले प्लेटफॉर्म) पहले से ही बैन हैं। अब वाट्सएप भी अगर इस लिस्ट में शामिल होता है, तो यह लाखों रूसी यूज़र्स को प्रभावित करेगा जो दैनिक जीवन में इस ऐप का उपयोग करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद सिर्फ डेटा सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक और भू-राजनीतिक तनाव भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। रूस अपनी टेक्नोलॉजी इंडिपेंडेंस को लेकर अब और सख्त हो रहा है और पश्चिमी प्रभाव को सीमित करने की कोशिश कर रहा है। मेटा की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन यह स्पष्ट है कि कंपनी के लिए रूस में संचालन जारी रखना अब और कठिन होता जा रहा है।
यह मामला एक बार फिर इस सवाल को उठाता है कि वैश्विक टेक कंपनियों को कैसे अलग-अलग देशों की संप्रभुता और साइबर नीतियों का सम्मान करते हुए काम करना चाहिए, खासकर जब geopolitics और टेक्नोलॉजी टकराने लगें।



