
विजय दिवस के पावन अवसर पर राष्ट्रपति भवन में ‘परम वीर दीर्घा’ का भव्य उद्घाटन किया गया, जो भारत के उन अदम्य साहसी सैनिकों को समर्पित है, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। यह दीर्घा भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के उन जांबाजों की वीरगाथाओं को सजीव रूप में प्रस्तुत करती है, जिन्हें सर्वोच्च सैन्य सम्मान परम वीर चक्र से अलंकृत किया गया है। उद्घाटन समारोह के दौरान शहीदों को नमन करते हुए उनके परिवारों के त्याग और बलिदान को भी सम्मानित किया गया। ‘परम वीर दीर्घा’ केवल एक प्रदर्शनी स्थल नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जहां अत्याधुनिक तकनीक, दुर्लभ चित्रों, युद्ध-संस्मरणों और इंटरएक्टिव माध्यमों के जरिए शौर्य की कहानियां जीवंत होती हैं। दीर्घा में 1971 के युद्ध सहित विभिन्न सैन्य अभियानों में असाधारण वीरता दिखाने वाले सैनिकों के योगदान को क्रमबद्ध रूप से दर्शाया गया है, जिससे देशवासियों को यह समझने का अवसर मिलता है कि स्वतंत्रता और संप्रभुता की रक्षा किस कीमत पर संभव हुई। विजय दिवस पर इसका उद्घाटन इस बात का प्रतीक है कि भारत अपने वीरों को केवल स्मरण ही नहीं करता, बल्कि उनके आदर्शों को आत्मसात भी करता है। समारोह में राष्ट्र के शीर्ष नेतृत्व, सशस्त्र बलों के अधिकारी, पूर्व सैनिक और शहीदों के परिजन उपस्थित रहे, जिनकी आंखों में गर्व और सम्मान की भावना झलक रही थी। दीर्घा का उद्देश्य युवाओं में देशभक्ति की भावना को सुदृढ़ करना, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा का महत्व समझाना तथा राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना है। यहां प्रस्तुत कथाएं यह संदेश देती हैं कि कठिन परिस्थितियों में भी साहस, रणनीति और निस्वार्थ सेवा से विजय प्राप्त की जा सकती है। ‘परम वीर दीर्घा’ राष्ट्रपति भवन की सांस्कृतिक विरासत में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ती है और यह सुनिश्चित करती है कि भारत के वीर सपूतों का बलिदान समय की धूल में ओझल न हो। विजय दिवस पर दिया गया यह सम्मान देश के हर नागरिक को कृतज्ञता, गर्व और जिम्मेदारी का अहसास कराता है—कि राष्ट्र की रक्षा केवल सीमा पर ही नहीं, बल्कि अपने आचरण और कर्तव्यों से भी की जाती है।



