
कांग्रेस नेता Pawan Khera ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भारत को क्षेत्रीय और वैश्विक कूटनीति में अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए थी, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में देश एक “मूक दर्शक” की तरह दिखाई दिया।
पवन खेड़ा ने केंद्र की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत की ऐतिहासिक रूप से पश्चिम एशिया क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपस्थिति रही है। उनके अनुसार ऐसे अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में भारत की आवाज और प्रभाव अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए।
कांग्रेस नेता की इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष का कहना है कि भारत को वैश्विक मंचों पर अपनी रणनीतिक भूमिका और मजबूत करनी चाहिए, जबकि सरकार समर्थक पक्ष विदेश नीति को संतुलित और व्यावहारिक बता रहा है।
अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की दिशा में हुई प्रगति को अंतरराष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। इसका प्रभाव ऊर्जा बाजार, क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है। भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश भी इस प्रक्रिया के परिणामों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत लंबे समय से सभी प्रमुख देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की नीति पर काम करता रहा है। ऐसे में किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते पर उसकी भूमिका का आकलन केवल सार्वजनिक बयानों के आधार पर नहीं किया जा सकता।
फिलहाल अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं जारी हैं और इस मुद्दे पर केंद्र तथा विपक्ष के बीच मतभेद स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।



