RTI पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान सूचना का अधिकार (RTI) कानून के कथित दुरुपयोग पर सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि कुछ मामलों में RTI एक्टिविज्म का उद्देश्य जनहित के बजाय व्यक्तिगत लाभ या दबाव बनाने का माध्यम बनता दिखाई देता है। इसी संदर्भ में न्यायालय ने याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) देने से इनकार कर दिया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि RTI कानून पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया था, लेकिन यदि इसका इस्तेमाल अनुचित उद्देश्यों के लिए किया जाता है तो यह कानून की मूल भावना के विपरीत है। न्यायालय ने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की कि कुछ लोग स्वयं को प्रभावशाली सामाजिक कार्यकर्ता या एक्टिविस्ट के रूप में प्रस्तुत कर व्यवस्था पर अनावश्यक दबाव बनाने की कोशिश करते हैं।
मामले में याचिकाकर्ता की ओर से गिरफ्तारी से संरक्षण की मांग की गई थी, लेकिन अदालत उपलब्ध तथ्यों और आरोपों को देखते हुए राहत देने के पक्ष में नहीं दिखी। न्यायालय ने कहा कि जांच प्रक्रिया को स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ने दिया जाना चाहिए।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी RTI कानून के महत्व को कम नहीं करती, बल्कि इसके जिम्मेदार और जनहितकारी उपयोग की आवश्यकता पर जोर देती है। RTI को लोकतांत्रिक व्यवस्था में पारदर्शिता का एक महत्वपूर्ण साधन माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अदालतें लगातार यह स्पष्ट करती रही हैं कि किसी भी कानून का दुरुपयोग स्वीकार्य नहीं है, चाहे उसका उद्देश्य कितना भी महत्वपूर्ण क्यों न हो। इसलिए प्रत्येक मामले का मूल्यांकन उसके तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर किया जाता है।
इस फैसले के बाद RTI के उपयोग और उसके दायरे को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। न्यायपालिका का संदेश स्पष्ट माना जा रहा है कि जनहित के लिए बने कानूनों का इस्तेमाल जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ किया जाना चाहिए।



