सोनम वांगचुक के पिता ने भी की थी भूख हड़ताल, 42 साल पहले इंदिरा गांधी को जाना पड़ा था लेह

लद्दाख के सामाजिक मुद्दों को लेकर चर्चा में आए सोनम वांगचुक के परिवार का एक पुराना किस्सा फिर सुर्खियों में है। करीब 42 साल पहले उनके पिता सोनम वांग्याल ने भी क्षेत्रीय मांगों को लेकर भूख हड़ताल का ऐलान किया था, जिसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री Indira Gandhi को लेह पहुंचकर उनसे बातचीत करनी पड़ी थी।
यह घटना 1980 के दशक की बताई जाती है, जब लद्दाख में क्षेत्रीय अधिकारों और विकास से जुड़े मुद्दों को लेकर असंतोष था। सोनम वांग्याल उस समय क्षेत्र के प्रमुख नेताओं में शामिल थे और उनकी मांगों को लेकर आंदोलन तेज हुआ था। रिपोर्टों के अनुसार, स्थिति को संभालने के लिए इंदिरा गांधी ने खुद लेह जाकर बातचीत की थी।
अब जब सोनम वांगचुक लद्दाख से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन और भूख हड़ताल कर रहे हैं, तो उनके पिता के उस पुराने संघर्ष की तुलना की जा रही है। वांगचुक पर्यावरण, शिक्षा और लद्दाख के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर लंबे समय से सक्रिय रहे हैं।
सोनम वांगचुक के मौजूदा आंदोलन में लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा, स्थानीय अधिकारों और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दे उठाए जा रहे हैं। इसको लेकर केंद्र सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत भी होती रही है।
इतिहास के इस पुराने प्रसंग को लेकर समर्थक इसे पिता और पुत्र के सामाजिक सरोकारों की समानता के रूप में देख रहे हैं, जबकि राजनीतिक दल इसे अपने-अपने नजरिये से पेश कर रहे हैं।
सोनम वांगचुक और उनके पिता के आंदोलनों के बीच सबसे बड़ा समान तत्व लद्दाख के लोगों से जुड़े मुद्दों को सामने रखने के लिए भूख हड़ताल जैसे अहिंसक माध्यम का इस्तेमाल है।



