UGC-AICTE खत्म करने वाले शिक्षा बिल पर JPC की चिंता, एकल नियामक को लेकर उठे सवाल

उच्च शिक्षा क्षेत्र में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखने वाले ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025’ को लेकर संसद की संयुक्त समिति (JPC) ने गंभीर चिंताएं जताई हैं। इस बिल में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) जैसे मौजूदा निकायों को हटाकर एक नए एकीकृत नियामक की व्यवस्था का प्रस्ताव है।
JPC ने आशंका जताई है कि एक ही संस्था में बहुत अधिक नियामक शक्तियां केंद्रित होने से उच्च शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है। समिति ने विधेयक में प्रस्तावित ढांचे, जवाबदेही और शक्तियों के संतुलन को लेकर सुधारों की जरूरत बताई है।
प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य उच्च शिक्षा के नियमन को सरल बनाना और अलग-अलग संस्थाओं की जगह एक समन्वित व्यवस्था तैयार करना बताया गया है। सरकार का तर्क है कि इससे नियमों में एकरूपता आएगी और उच्च शिक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
हालांकि, कई शिक्षाविदों और संस्थानों ने भी बिल में संस्थागत स्वायत्तता, राज्यों की भागीदारी और नियामक शक्तियों के संतुलन को लेकर सुझाव दिए हैं। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि नई व्यवस्था लागू करने से पहले व्यापक चर्चा और स्पष्ट सुरक्षा प्रावधान जरूरी हैं।
UGC वर्तमान में विश्वविद्यालयों के मानक तय करने और अनुदान से जुड़े कार्यों में अहम भूमिका निभाता है, जबकि AICTE तकनीकी शिक्षा और NCTE शिक्षक शिक्षा से जुड़े नियमन का काम करते हैं। नए विधेयक के लागू होने पर उच्च शिक्षा नियमन की मौजूदा संरचना में बड़ा बदलाव हो सकता है।
अब विधेयक में JPC की सिफारिशों और आगे की संसदीय प्रक्रिया पर नजर रहेगी। अंतिम स्वरूप संसद में चर्चा और निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।



