
अमेरिका में एक बार फिर से परमाणु परीक्षण (Nuclear Testing) को लेकर बहस तेज हो गई है। अमेरिकी सीनेटर जेडी वेंस (JD Vance) ने हाल ही में दिए अपने बयान में कहा कि यह पक्का किया जाए कि अमेरिका की रक्षा क्षमता किसी भी देश से कमजोर न हो। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक हालात में अमेरिका को एक बार फिर अपने न्यूक्लियर टेस्टिंग प्रोग्राम की समीक्षा करनी चाहिए।
जेडी वेंस का यह बयान उस समय आया है जब रूस और चीन जैसे देश अपनी परमाणु क्षमता को तेजी से बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके परमाणु हथियार पुराने न पड़ जाएं और नई तकनीकों के अनुरूप उनका परीक्षण किया जाए। वेंस ने कहा, “हमारे विरोधी देशों के पास आधुनिक परमाणु कार्यक्रम हैं, इसलिए हमें भी अपनी क्षमता का परीक्षण करने की जरूरत है ताकि हम किसी खतरे के सामने कमजोर न दिखें।”
हालांकि, इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता भी बढ़ा दी है। कई शांति समर्थक संगठनों ने कहा है कि अमेरिका का यह कदम वैश्विक परमाणु संतुलन को खतरे में डाल सकता है। वर्ष 1992 के बाद से अमेरिका ने कोई भी आधिकारिक परमाणु परीक्षण नहीं किया है। इसके बाद उसने Comprehensive Nuclear-Test-Ban Treaty (CTBT) पर हस्ताक्षर तो किए, लेकिन इसे कभी अनुमोदित नहीं किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका दोबारा न्यूक्लियर टेस्टिंग शुरू करता है, तो यह रूस और चीन को भी ऐसा करने का मौका देगा। इससे दुनिया में हथियारों की नई दौड़ (Arms Race) शुरू हो सकती है। वहीं, अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों का एक वर्ग यह तर्क देता है कि यह कदम केवल ‘डिटरेंस’ यानी रोकथाम की नीति को मजबूत करने के लिए जरूरी है, ताकि कोई देश अमेरिका की शक्ति को चुनौती न दे सके।
जेडी वेंस ने अपने बयान में कहा कि यह निर्णय केवल आक्रामक नीति नहीं, बल्कि “रक्षा सुरक्षा सुनिश्चित करने” के लिए एक रणनीतिक कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षण का उद्देश्य नए हथियार बनाना नहीं, बल्कि मौजूदा तकनीक की विश्वसनीयता की जांच करना है।



