
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लंबे समय से जारी सीमा तनाव और संघर्ष के बीच अब शांति की एक नई किरण दिखाई दी है। दोनों देशों ने आखिरकार सीजफायर (संघर्षविराम) पर सहमति जताई है। इस समझौते की घोषणा तुर्किए (Turkey) ने की है, जिसने इस पूरे विवाद में मध्यस्थ की अहम भूमिका निभाई। तुर्किए के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने आगे किसी भी तरह की हिंसा या गोलीबारी से बचने का फैसला किया है और बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान खोजने पर सहमति जताई है।
पिछले कुछ महीनों से पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर लगातार तनाव बढ़ रहा था। कई बार सीमा पार से गोलीबारी और रॉकेट हमलों की घटनाएं सामने आईं, जिसमें दोनों देशों के सैनिकों और नागरिकों को नुकसान पहुंचा। पाकिस्तान ने कई बार अफगानिस्तान पर आतंकियों को पनाह देने का आरोप लगाया था, जबकि अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर सीमा पार हमलों का जवाब देने की बात कही थी। इन हालातों ने क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बड़ा खतरा पैदा कर दिया था।
तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन के हस्तक्षेप के बाद दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच एक गोपनीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में दोनों पक्षों ने अपनी चिंताएं साझा कीं और एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करने का वादा किया। तुर्किए ने कहा कि यह समझौता न केवल पाकिस्तान और अफगानिस्तान के लिए बल्कि पूरे दक्षिण एशिया क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए अहम कदम है।
इस सीजफायर के तहत दोनों देशों ने सीमा सुरक्षा बढ़ाने, खुफिया जानकारी साझा करने और आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई पर भी सहमति दी है। इसके अलावा, एक संयुक्त निगरानी समिति बनाई जाएगी जो यह सुनिश्चित करेगी कि सीजफायर का उल्लंघन न हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता लंबे समय तक कायम रहता है, तो यह क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापारिक सहयोग के नए द्वार खोल सकता है। वहीं तुर्किए की इस पहल से उसकी अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक भूमिका और भी मजबूत हुई है। अब पूरी दुनिया की नजर इस पर टिकी है कि क्या पाकिस्तान और अफगानिस्तान इस शांति समझौते को निभा पाएंगे या यह केवल एक अस्थायी राहत साबित होगा।



