नशा छोड़ने का दावा, लेकिन सच अलग! Gen-Z की लाइफस्टाइल पर नई रिपोर्ट ने खोले कई राज

नई पीढ़ी यानी जेनरेशन-Z को अक्सर पिछली पीढ़ियों की तुलना में अधिक जागरूक और स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील माना जाता है। कई सर्वे और सोशल मीडिया ट्रेंड्स में यह दावा भी किया जाता रहा है कि Gen-Z शराब और नशे से दूरी बना रही है और ‘नशा मुक्त’ जीवनशैली को अपना रही है। हालांकि हाल ही में सामने आई एक नई रिपोर्ट ने इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भले ही पारंपरिक शराब या सिगरेट के सेवन में कुछ गिरावट देखने को मिल रही हो, लेकिन Gen-Z के बीच नशे के नए रूप तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इनमें वेपिंग, ई-सिगरेट, निकोटिन पाउच और अन्य वैकल्पिक नशे के उत्पाद शामिल हैं, जिन्हें कई युवा कम खतरनाक समझकर इस्तेमाल कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया और डिजिटल संस्कृति ने भी इन आदतों को प्रभावित किया है, जहां कई बार इन उत्पादों को ‘कूल’ या ‘ट्रेंडी’ लाइफस्टाइल का हिस्सा दिखाया जाता है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि तनाव, करियर का दबाव, पढ़ाई और तेजी से बदलती जीवनशैली के कारण युवा मानसिक राहत के लिए ऐसे विकल्पों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। खास बात यह है कि कई युवा पारंपरिक शराब या तंबाकू से दूरी बनाए रखते हुए भी इन नए उत्पादों को नशा नहीं मानते, जबकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ इन्हें भी उतना ही जोखिम भरा बताते हैं। इसके अलावा पार्टी कल्चर और देर रात की सोशल लाइफ भी युवाओं की आदतों में बदलाव ला रही है। डॉक्टरों और समाजशास्त्रियों का मानना है कि यह बदलाव केवल स्वास्थ्य का ही नहीं बल्कि सामाजिक व्यवहार का भी मुद्दा है। इसलिए जरूरी है कि युवाओं को नशे के हर रूप के बारे में सही जानकारी दी जाए और उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। कुल मिलाकर यह रिपोर्ट दिखाती है कि Gen-Z की जीवनशैली तेजी से बदल रही है, लेकिन ‘नशा मुक्त पीढ़ी’ का दावा पूरी तरह सही नहीं माना जा सकता। यह स्थिति समाज और नीति निर्माताओं दोनों के लिए चेतावनी की तरह है कि युवाओं के स्वास्थ्य और आदतों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।



