अमित शाह बोले- वंदे मातरम को पूरा गौरव लौटाने में लगे 80 साल

मुंबई में आयोजित अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वंदे मातरम को लेकर महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि देश के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को उसका पूरा गौरव वापस दिलाने में करीब 80 वर्ष लग गए।
अमित शाह ने अपने संबोधन में वंदे मातरम के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह गीत केवल एक रचना नहीं, बल्कि देश के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय चेतना से गहराई से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वंदे मातरम ने लोगों में देशभक्ति और एकता की भावना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस गीत ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष कर रहे लोगों को प्रेरणा देने का काम किया।
गृह मंत्री ने भारतीय भाषाओं और राजभाषा हिंदी के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की भाषाई विविधता देश की ताकत है और सभी भारतीय भाषाओं के सम्मान के साथ हिंदी को राजभाषा के रूप में आगे बढ़ाना जरूरी है।
अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का उद्देश्य हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने और सरकारी कामकाज में भारतीय भाषाओं के महत्व को मजबूत करना है। सम्मेलन में राजभाषा से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई और भाषा के व्यापक उपयोग पर विचार-विमर्श हुआ।
अमित शाह ने भारतीय संस्कृति, भाषा और राष्ट्रीय प्रतीकों के संरक्षण को देश की जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि नई पीढ़ी को इनके ऐतिहासिक महत्व की जानकारी होना जरूरी है। उन्होंने वंदे मातरम को देश की राष्ट्रीय चेतना का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
वंदे मातरम को लेकर अमित शाह का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय गीत के इतिहास, इसकी भूमिका और सम्मान को लेकर सार्वजनिक चर्चा जारी है। उनके संबोधन में राष्ट्रगीत के योगदान और भारतीय भाषाओं के महत्व को प्रमुखता दी गई।
कुल मिलाकर, अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में अमित शाह का संबोधन वंदे मातरम, भारतीय भाषाओं और राष्ट्रीय गौरव पर केंद्रित रहा। उन्होंने देश की सांस्कृतिक और भाषाई विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने पर जोर दिया।



