नंदन नीलेकणि को SIR नोटिस, वोटर लिस्ट में नाम का मामला

कर्नाटक में चल रही मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया यानी SIR के दौरान कई चर्चित लोगों के नाम डिस्क्रेपेंसी लिस्ट में सामने आए हैं। इनमें इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि और उनके परिवार के सदस्य भी शामिल हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक नीलेकणि परिवार के नाम ‘Unmapped with last SIR’ श्रेणी में दर्ज हैं। इसका संबंध पुराने मतदाता रिकॉर्ड से नाम के मैप न होने से है। यह अपने आप में किसी गलत काम का प्रमाण नहीं है, बल्कि मतदाता रिकॉर्ड के सत्यापन की प्रक्रिया का हिस्सा है।
नीलेकणि परिवार के नाम मौजूदा ड्राफ्ट मतदाता सूची में दर्ज बताए गए हैं। अधिकारियों की प्रक्रिया के तहत संबंधित मतदाताओं को आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराकर अपने रिकॉर्ड का सत्यापन कराना होगा। कर्नाटक में बड़ी संख्या में मतदाताओं के रिकॉर्ड की इस तरह जांच की जा रही है।
नंदन नीलेकणि देश में आधार व्यवस्था के शुरुआती निर्माण और UIDAI के नेतृत्व से भी जुड़े रहे हैं। वह इंफोसिस के सह-संस्थापक हैं और 2014 में बेंगलुरु दक्षिण लोकसभा सीट से चुनाव भी लड़ चुके हैं।
इस SIR प्रक्रिया में सिर्फ नीलेकणि परिवार ही नहीं, बल्कि कई अन्य प्रमुख लोगों के नाम भी रिकॉर्ड संबंधी विसंगतियों की सूची में सामने आए हैं। हालांकि हर मामले में नोटिस जारी होने की स्थिति एक जैसी नहीं है। उदाहरण के लिए वैज्ञानिक सीएनआर राव के मामले में अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि उन्हें आधिकारिक नोटिस नहीं दिया गया।
मतदाता सूची की यह प्रक्रिया रिकॉर्ड को अपडेट और सत्यापित करने के उद्देश्य से चल रही है। ऐसे में ‘डिस्क्रेपेंसी’ या ‘अनमैप्ड’ श्रेणी में नाम आने का अर्थ सीधे तौर पर मतदाता का नाम हट जाना नहीं है; संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन के बाद रिकॉर्ड को अंतिम सूची में शामिल किया जा सकता है।



