
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच पार्टी की नेता Kakoli Ghosh Dastidar ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि बागी गुट के साथ 22 लोकसभा सांसदों का समर्थन मौजूद है। उनका यह बयान उस समय आया है जब लोकसभा अध्यक्ष से संभावित मुलाकात को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं।
काकोली घोष के दावे ने राष्ट्रीय राजनीति और पश्चिम बंगाल की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो संसद में टीएमसी की स्थिति और पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन पर इसका असर पड़ सकता है।
हालांकि पार्टी की ओर से आधिकारिक रूप से इस दावे पर क्या रुख अपनाया जाएगा, इस पर सभी की नजर बनी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे दावे अक्सर शक्ति प्रदर्शन और संगठनात्मक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकते हैं।
तृणमूल कांग्रेस लंबे समय से पश्चिम बंगाल की प्रमुख राजनीतिक शक्ति रही है और राष्ट्रीय राजनीति में भी उसकी महत्वपूर्ण उपस्थिति है। ऐसे में पार्टी के भीतर किसी भी प्रकार के मतभेद या गुटबाजी की खबरें स्वाभाविक रूप से राजनीतिक महत्व रखती हैं।
संसदीय मामलों के जानकारों का कहना है कि यदि किसी दल के भीतर औपचारिक विभाजन या अलग गुट बनने की स्थिति पैदा होती है, तो उससे जुड़े संवैधानिक और संसदीय प्रावधान भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं। इसलिए स्पीकर से होने वाली संभावित मुलाकात पर विशेष नजर रखी जा रही है।
फिलहाल राजनीतिक हलकों में काकोली घोष के दावे की चर्चा है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर टीएमसी नेतृत्व तथा संबंधित सांसदों की प्रतिक्रियाएं स्थिति को और स्पष्ट कर सकती हैं।



