IBC Loan Haircut: ₹2200 करोड़ का कर्ज ₹6.5 करोड़ में निपटा, ED सख्त

दिवालिया कानून के तहत बड़े कर्ज के निपटारे में भारी हेयरकट को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की सक्रियता बढ़ गई है। ₹2200 करोड़ के कर्ज का करीब ₹6.5 करोड़ में निपटारा होने के मामले ने बैंकिंग और वित्तीय व्यवस्था में कई सवाल खड़े किए हैं।
IBC का उद्देश्य आर्थिक संकट में फंसी कंपनियों के मामलों का समयबद्ध तरीके से समाधान करना है। इसके तहत कर्जदाताओं और कंपनियों के बीच समाधान प्रक्रिया के जरिए बकाया रकम की वसूली का रास्ता तय किया जाता है।
हालांकि, जब किसी बड़े कर्ज का निपटारा मूल बकाया रकम की तुलना में बेहद कम राशि पर होता है, तो इसे लेकर सवाल उठ सकते हैं। इसी तरह के मामलों में ED अब यह जांच कर रहा है कि कहीं दिवालिया प्रक्रिया का इस्तेमाल जानबूझकर बड़े कर्ज से राहत हासिल करने के लिए तो नहीं किया गया।
ED की कार्रवाई का फोकस उन मामलों पर भी हो सकता है जहां प्रमोटरों की भूमिका, संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े सवाल सामने आते हैं। यदि किसी मामले में मनी लॉन्ड्रिंग या अपराध से अर्जित संपत्ति का संदेह होता है तो PMLA के तहत कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।
बड़े लोन के निपटारे में होने वाले ‘हेयरकट’ का सीधा असर बैंकों और वित्तीय संस्थानों की वसूली पर पड़ता है। इसलिए ऐसे मामलों में यह देखना महत्वपूर्ण होता है कि समाधान प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से हुई या नहीं।
IBC के तहत किसी कंपनी के समाधान में कर्जदाताओं को कई बार अपने बकाये का एक हिस्सा छोड़ना पड़ता है। इसे हेयरकट कहा जाता है। लेकिन अत्यधिक बड़े हेयरकट के मामलों में प्रक्रिया और संबंधित पक्षों की भूमिका की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
ED की सख्ती से यह संकेत मिलता है कि एजेंसी केवल कर्ज के निपटारे को नहीं, बल्कि उससे जुड़े संभावित वित्तीय अपराधों और प्रमोटरों की भूमिका को भी जांच के दायरे में रख रही है।
आने वाले समय में ऐसे मामलों में जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट हो सकता है कि IBC प्रक्रिया के तहत हुए बड़े हेयरकट सामान्य व्यावसायिक समाधान का हिस्सा थे या उनमें किसी तरह की अनियमितता की आशंका है।



