ICMR रिपोर्ट: भारत के 87% वयस्कों में कोलेस्ट्रॉल का खतरा, चौंकाने वाला खुलासा

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की एक हालिया रिपोर्ट में देश के वयस्कों की हृदय स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारत के लगभग 87 प्रतिशत वयस्कों में किसी न किसी प्रकार की असामान्य लिपिड प्रोफाइल या कोलेस्ट्रॉल संबंधी समस्या का जोखिम पाया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ता तनाव, असंतुलित खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी और मोटापा इस स्थिति के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए तो हृदय रोग, स्ट्रोक और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए आवश्यक वसा जैसा पदार्थ है, लेकिन इसकी मात्रा असंतुलित होने पर समस्या पैदा हो सकती है। खासतौर पर खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) का स्तर बढ़ना और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) का कम होना हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच और डॉक्टर की सलाह के अनुसार जीवनशैली में बदलाव करना महत्वपूर्ण माना जाता है।
विशेषज्ञ संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, धूम्रपान और तंबाकू से दूरी तथा वजन नियंत्रित रखने की सलाह देते हैं। रोजाना कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि, हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और स्वस्थ वसा का सेवन कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखने में मदद कर सकता है। वहीं, तले-भुने और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना भी लाभदायक माना जाता है।
40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों, मधुमेह, उच्च रक्तचाप या पारिवारिक हृदय रोग के इतिहास वाले व्यक्तियों को समय-समय पर लिपिड प्रोफाइल जांच कराने की सलाह दी जाती है। हालांकि, यदि किसी युवा में भी मोटापा, अस्वस्थ जीवनशैली या अन्य जोखिम कारक मौजूद हैं, तो डॉक्टर की सलाह पर जांच कराई जा सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कोलेस्ट्रॉल की समस्या अक्सर शुरुआती चरण में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाती। इसलिए नियमित हेल्थ चेकअप, संतुलित जीवनशैली और चिकित्सकीय सलाह का पालन ही हृदय को स्वस्थ रखने का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।



