Kalbaishakhi: पूर्वी भारत में आंधी का खतरा, बंगाल पर मंडरा रहा संकट

कालबैसाखी, जिसे पूर्वी भारत में प्री-मानसून आंधी-तूफान के रूप में जाना जाता है, एक बार फिर पश्चिम बंगाल और आसपास के क्षेत्रों के लिए चुनौती बनकर सामने आ रहा है। तेज हवाएं, बिजली गिरने और अचानक भारी बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती है। यह मौसमी प्रणाली आमतौर पर अप्रैल से जून के बीच सक्रिय रहती है और खेती, बिजली आपूर्ति तथा बुनियादी ढांचे पर सीधा असर डालती है।
पश्चिम बंगाल के कई जिलों में इस दौरान मौसम तेजी से बदलता है, जिससे निचले इलाकों में जलभराव और पेड़ गिरने जैसी घटनाएं आम हो जाती हैं। किसानों के लिए यह समय मिश्रित प्रभाव लेकर आता है—जहां एक ओर यह गर्मी से राहत देता है, वहीं दूसरी ओर फसलों को नुकसान पहुंचाने का खतरा भी रहता है।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते जलवायु पैटर्न के कारण कालबैसाखी की तीव्रता और अनिश्चितता दोनों बढ़ रही हैं। ऐसे में प्रशासन और स्थानीय लोगों को पहले से सतर्क रहने और सुरक्षा उपाय अपनाने की जरूरत है, ताकि किसी भी बड़े नुकसान से बचा जा सके।



