करूर भगदड़: पीड़ित परिवारों की नौकरी पर SC की बड़ी राहत, HC आदेश पर रोक

करूर भगदड़ मामले में तमिलनाडु सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी, जिसमें करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने के राज्य सरकार के फैसले को रद्द कर दिया गया था। मामले की सुनवाई जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने की।
मामला सितंबर 2025 में करूर में हुई भीषण भगदड़ से जुड़ा है, जिसमें 41 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने मृतकों के परिवारों के पात्र सदस्यों को सरकारी नौकरी देने का फैसला किया था। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने जुलाई में 31 परिजनों को नियुक्ति आदेश भी सौंपे थे।
हालांकि, मद्रास हाईकोर्ट ने 27 जुलाई को सरकार के इस फैसले को रद्द कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि सार्वजनिक रोजगार संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता और अवसर के सिद्धांतों के अनुरूप होना चाहिए। कोर्ट ने यह भी चिंता जताई थी कि इस तरह की नियुक्तियों से भविष्य में ऐसी मांगों के लिए रास्ता खुल सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पीड़ित परिवारों को रोजगार देने के सरकार के फैसले पर सवाल उठाने को लेकर अहम टिप्पणी की। अदालत ने पूछा कि यदि किसी हादसे में परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य मारा गया हो, तो सरकार उसके बेटे या बेटी को रोजगार देकर मदद क्यों नहीं कर सकती।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है और हाईकोर्ट के फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है। इसका अर्थ है कि हाईकोर्ट का आदेश इस स्तर पर प्रभावी नहीं रहेगा, जबकि मामले की आगे सुनवाई जारी रहेगी।
हाईकोर्ट में याचिकाकर्ताओं ने सरकारी नौकरियों के लिए निर्धारित नियमों और समान अवसर का हवाला देते हुए सरकार के फैसले को चुनौती दी थी। दूसरी ओर, राज्य सरकार ने इसे पीड़ित परिवारों को राहत और सहायता देने की नीति का हिस्सा बताया। सुप्रीम कोर्ट के ताजा हस्तक्षेप के बाद अब इस मुद्दे पर अंतिम कानूनी स्थिति आगे की सुनवाई के बाद स्पष्ट होगी।



