राधाष्टमी 2026: ब्रज में राधारानी के प्राकट्य की धूम
राधाष्टमी को ब्रज की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में विशेष स्थान प्राप्त है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह दिन श्रीमती राधारानी के प्राकट्य को समर्पित है। राधारानी को भगवान श्रीकृष्ण की प्रिय संगिनी और प्रेम-भक्ति का स्वरूप माना जाता है।
राधाष्टमी के मौके पर बरसाना और वृंदावन समेत पूरे ब्रज क्षेत्र में मंदिरों को सजाया गया और विशेष पूजा-अर्चना की गई। मंदिरों में भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों के बीच श्रद्धालुओं ने राधारानी के दर्शन कर आशीर्वाद की कामना की।
बरसाना को राधारानी की प्रमुख लीला स्थली के रूप में देखा जाता है। यहां स्थित लाड़ली जी मंदिर में राधाष्टमी का मुख्य उत्सव होता है। वहीं रावल को राधारानी के प्राकट्य से और वृंदावन को उनकी रास लीलाओं से जोड़कर देखा जाता है, जिसके चलते तीनों स्थानों पर विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं।
राधाष्टमी के दिन ब्रज की गलियों और मंदिर परिसरों में ‘राधे-राधे’ के जयकारे सुनाई देते हैं। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस पर्व ने एक बार फिर ब्रज की धार्मिक आस्था के साथ-साथ उसकी सांस्कृतिक और भक्ति परंपरा को भी जीवंत किया।
राधारानी के प्राकट्य उत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहता है। बरसाना, वृंदावन और आसपास के क्षेत्रों में होने वाले आयोजन ब्रज की उस परंपरा को दर्शाते हैं, जिसमें राधा-कृष्ण की भक्ति और प्रेम को धार्मिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।



