धर्म-आस्था

Ramayan Katha : हनुमानजी की पूंछ और शनि की नजर

यूं लगी लंका में आग, धू-धू कर जला रावण राज

Ramayan की कथाओं में लंका दहन की घटना अत्यंत रोचक और अद्भुत मानी जाती है। यह प्रसंग न केवल भक्ति और शक्ति का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने वाली शक्ति को कोई भी रोक नहीं सकता। इस कथा में Hanuman की वीरता और बुद्धिमत्ता का अद्भुत वर्णन मिलता है।

कहा जाता है कि जब हनुमानजी माता सीता की खोज में लंका पहुंचे, तब उन्होंने अपनी विशाल शक्ति और बुद्धि का परिचय दिया। रावण के सैनिकों ने उन्हें बंदी बनाने का प्रयास किया, लेकिन हनुमानजी ने अपनी चपलता से स्वयं को हर परिस्थिति से बचा लिया। इसी दौरान रावण ने उनके अपमान का आदेश दिया, जिसके बाद उनकी पूंछ में आग लगाने की योजना बनाई गई।

जैसे ही हनुमानजी की पूंछ में अग्नि लगाई गई, वह आग सामान्य नहीं रही। उनकी दिव्य शक्ति और आशीर्वाद के कारण वह अग्नि पूरे लंका नगर में फैलने लगी। देखते ही देखते सोने की नगरी धू-धू कर जल उठी और रावण का अभिमान चकनाचूर होने लगा। यह घटना अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक बन गई।

कुछ मान्यताओं के अनुसार इस घटना में Shani Dev की दृष्टि का भी प्रभाव बताया जाता है। शनि देव की दृष्टि को न्याय और कर्मफल का प्रतीक माना जाता है, और कहा जाता है कि जब अधर्म अपने चरम पर पहुंचता है, तब उसका परिणाम भी उतना ही तीव्र होता है।

लंका दहन के बाद रावण के साम्राज्य की नींव हिलने लगी और यह घटना आने वाले युद्ध की शुरुआत का संकेत बनी। हनुमानजी ने अपनी इस लीला से न केवल माता सीता को संदेश दिया, बल्कि श्रीराम के विजय मार्ग को भी और मजबूत कर दिया।

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