
हिंदू शास्त्रों और परंपराओं में शुभ कार्यों के दौरान पति-पत्नी के बैठने की दिशा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता के अनुसार, कई धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ में पत्नी का स्थान पति के बाईं ओर होना शुभ माना जाता है, जिसे “वामांग” परंपरा कहा जाता है।
शास्त्रों में कहा गया है कि बाईं ओर स्थान स्त्री शक्ति और समर्पण का प्रतीक होता है, जबकि दाईं ओर स्थान पुरुष शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए विवाह, पूजा या यज्ञ जैसे शुभ कार्यों में दोनों का संतुलन बनाए रखना आवश्यक माना गया है।
हालांकि कुछ विशेष अनुष्ठानों में परंपरा और क्षेत्रीय रीति-रिवाजों के अनुसार अंतर भी देखने को मिलता है। इसलिए किसी भी धार्मिक कार्य में स्थानीय पंडित या परंपरा के अनुसार ही विधि का पालन करना उचित माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस नियम का उद्देश्य केवल दिशा नहीं बल्कि पति-पत्नी के बीच संतुलन, सम्मान और सामंजस्य को दर्शाना है।



