UP में माफिया की संपत्ति पर बनेगा आवासीय प्रोजेक्ट, अधिवक्ता-डॉक्टर और पत्रकारों को मिलेंगे फ्लैट

उत्तर प्रदेश में माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई के बाद अब जब्त की गई संपत्तियों का उपयोग जनहित के लिए करने की दिशा में योगी सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार की योजना है कि माफिया और अपराधियों से कब्जे में ली गई जमीनों पर हाईराइज आवासीय परियोजनाएं विकसित की जाएं, जिनमें अधिवक्ताओं, डॉक्टरों और पत्रकारों को प्राथमिकता के आधार पर फ्लैट उपलब्ध कराए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य एक तरफ अपराधियों की अवैध कमाई को खत्म करना है, तो दूसरी तरफ समाज के महत्वपूर्ण पेशों से जुड़े लोगों को बेहतर आवासीय सुविधाएं देना भी है। बताया जा रहा है कि प्रदेश के कई शहरों में माफिया की करोड़ों रुपये की संपत्तियां पहले ही जब्त की जा चुकी हैं। इन जमीनों का उपयोग पहले खाली पड़ा रहने के बजाय अब सुनियोजित आवासीय योजनाओं के लिए किया जाएगा। सरकार चाहती है कि इन परियोजनाओं के जरिए शहरों में आधुनिक सुविधाओं से लैस बहुमंजिला आवास तैयार किए जाएं, जिनमें पार्किंग, हरित क्षेत्र, सुरक्षा व्यवस्था और सामुदायिक सुविधाएं भी शामिल हों। अधिकारियों के मुताबिक, इस योजना के लिए नगर विकास विभाग और आवास विकास परिषद मिलकर काम कर सकते हैं। इसके तहत अधिवक्ताओं, डॉक्टरों और पत्रकारों को रियायती दरों पर फ्लैट देने की भी संभावना जताई जा रही है, ताकि इन पेशों से जुड़े लोगों को सुरक्षित और बेहतर आवास मिल सके। प्रदेश सरकार का मानना है कि यह कदम अपराध के खिलाफ सख्त संदेश देने के साथ-साथ शहरी विकास को भी नई दिशा देगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले भी कई बार कह चुके हैं कि माफिया की अवैध कमाई से अर्जित संपत्ति को जनता के हित में इस्तेमाल किया जाएगा। इसी नीति के तहत पहले भी कुछ जगहों पर माफिया की जमीन पर सरकारी इमारतें, स्कूल और गरीबों के लिए आवास बनाए जा चुके हैं। अब प्रस्तावित हाईराइज आवासीय योजना को उसी कड़ी का अगला कदम माना जा रहा है। अगर यह योजना बड़े पैमाने पर लागू होती है, तो इससे न केवल अवैध कब्जों पर प्रभावी रोक लगेगी बल्कि शहरों में संगठित और आधुनिक आवासीय ढांचा भी विकसित होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की योजनाएं अपराध के खिलाफ मजबूत संदेश देने के साथ-साथ राज्य में पारदर्शी और जनहितकारी शासन की छवि को भी मजबूत करती हैं।



