अमेरिका ने चीन पर 3 मोर्चों पर बढ़ाया दबाव, ट्रंप-शी मुलाकात से पहले हलचल

अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने 28 अक्टूबर को तीन चीनी कंपनियों—BGI Genomics, MGI Tech और Shenzhen BGI Technology—को उइगर फोर्स्ड लेबर प्रिवेंशन एक्ट (UFLPA) की सूची में शामिल किया।
अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि इन कंपनियों की गतिविधियां चीन के शिनजियांग क्षेत्र में उइगर और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े कथित जबरन श्रम को सक्षम बनाने में भूमिका निभाती हैं। इस सूची में शामिल होने के बाद इन कंपनियों के सामान को अमेरिका में प्रवेश से रोका जा सकता है, जब तक संबंधित पक्ष यह साबित न कर दें कि सामान जबरन श्रम से नहीं बनाया गया है।
हालांकि, कंपनियों ने आरोपों को खारिज किया है। BGI समूह ने कहा कि वह किसी भी तरह के जबरन श्रम में शामिल नहीं है, जबकि चीन ने अमेरिकी कार्रवाई को चीनी कंपनियों पर दबाव बनाने का प्रयास बताया है। इसलिए इन आरोपों को अमेरिकी सरकार का दावा मानना चाहिए, न कि न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य।
2. चीनी नागरिकों के लिए वीजा-मुक्त यात्रा कार्यक्रम निलंबित
अमेरिका ने उत्तरी मारियाना द्वीप समूह के Economic Vitality and Security Travel Authorization Program (EVS-TAP) को भी निलंबित करने का फैसला किया है। इस कार्यक्रम के तहत पूर्व जांच से गुजर चुके चीनी नागरिक कुछ शर्तों के साथ बिना पारंपरिक वीजा के इन द्वीपों की यात्रा कर सकते थे।
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग का कहना है कि इस व्यवस्था से सुरक्षा संबंधी जोखिम पैदा हो सकते हैं। अधिकारियों ने गुआम और टिनियन जैसे द्वीपों पर अमेरिकी सैन्य ठिकानों की निकटता, संभावित जासूसी, तस्करी और अन्य चिंताओं का हवाला दिया है।
अमेरिकी संघीय रजिस्टर में प्रकाशित नोटिस के मुताबिक, निलंबन 30 अक्टूबर 2026 को स्थानीय समयानुसार दोपहर 2 बजे से प्रभावी होना निर्धारित है। वित्त वर्ष 2025 में 3,000 से अधिक चीनी नागरिकों ने इस कार्यक्रम का इस्तेमाल किया था।
3. विश्वविद्यालयों में चीन-वित्तपोषित केंद्रों पर कार्रवाई
तीसरा मोर्चा अमेरिकी विश्वविद्यालयों में चीन-वित्तपोषित कन्फ्यूशियस इंस्टीट्यूट्स से जुड़ा है। ये केंद्र चीनी भाषा और संस्कृति से संबंधित गतिविधियां चलाते रहे हैं।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने दावा किया कि विश्वविद्यालयों में अलग-अलग नामों से संचालित 80 से अधिक केंद्रों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। अमेरिकी प्रशासन ने इन संस्थानों को बौद्धिक संपदा की सुरक्षा और विदेशी प्रभाव के लिहाज से चिंता का विषय बताया है।
वहीं, चीन ने ऐसी आलोचना का विरोध किया है और कन्फ्यूशियस इंस्टीट्यूट्स को निशाना बनाने वाली कार्रवाई को अनुचित बताया है। इस विवाद के केंद्र में अमेरिकी विश्वविद्यालयों की शोध सुरक्षा, विदेशी वित्तपोषण और अकादमिक सहयोग जैसे मुद्दे हैं।
ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात से पहले क्यों अहम हैं ये कदम?
अमेरिका और चीन के बीच व्यापार शुल्क, महत्वपूर्ण तकनीक, दुर्लभ खनिज और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर लंबे समय से मतभेद रहे हैं। दोनों देशों ने सितंबर 2026 में व्यापार और तकनीक पर बातचीत के दौरान कुछ क्षेत्रों में सहयोग जारी रखने पर सहमति जताई थी, लेकिन कई विवाद अब भी बने हुए हैं।
ऐसे माहौल में कंपनियों, यात्रा व्यवस्था और विश्वविद्यालयों से जुड़े कदम दोनों देशों के रिश्तों में दबाव बढ़ा सकते हैं। हालांकि, इन कार्रवाइयों से यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि प्रस्तावित शीर्षस्तरीय मुलाकात रद्द हो जाएगी या व्यापार वार्ता पूरी तरह विफल हो जाएगी।
क्या चीन की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा असर?
जीनोमिक्स कंपनियों पर आयात प्रतिबंध का असर उनके अमेरिकी कारोबार और संबंधित आपूर्ति शृंखलाओं पर पड़ सकता है। यात्रा कार्यक्रम के निलंबन से प्रभावित यात्रियों को वैकल्पिक वीजा प्रक्रिया अपनानी पड़ सकती है। वहीं, विश्वविद्यालयों से जुड़े प्रतिबंध और जांच अकादमिक सहयोग तथा शोध वित्तपोषण को प्रभावित कर सकते हैं।
हालांकि, इन कदमों का व्यापक आर्थिक असर कितना होगा, यह संबंधित कंपनियों के अमेरिकी बाजार में कारोबार, प्रतिबंधों के दायरे और आगे की सरकारी नीतियों पर निर्भर करेगा।
निष्कर्ष
अमेरिका ने चीन से जुड़े तीन अलग-अलग क्षेत्रों—जीनोमिक्स कंपनियों, यात्रा नियमों और विश्वविद्यालयों—में कार्रवाई की है। वॉशिंगटन ने इन कदमों के पीछे श्रम अधिकारों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया है, जबकि बीजिंग और संबंधित कंपनियों ने आरोपों का विरोध किया है। अब दोनों देशों के बीच आगे की बातचीत यह तय करने में अहम होगी कि तनाव कम होता है या व्यापार और तकनीक से जुड़े विवाद और गहराते हैं।



