जापान के शाही उत्तराधिकार कानून में बदलाव, फिर भी प्रिंसेस आइको नहीं बन पाएंगी महारानी

जापान के शाही परिवार के उत्तराधिकार कानून में बदलाव को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है, लेकिन इसके बावजूद प्रिंसेस आइको के जापान की सम्राट बनने का रास्ता अभी साफ नहीं हुआ है। इसकी वजह देश का मौजूदा शाही उत्तराधिकार कानून है, जिसमें पुरुष वंश को प्राथमिकता दी गई है।
प्रिंसेस आइको जापान के वर्तमान सम्राट नारुहितो और महारानी मसाको की इकलौती संतान हैं। उनकी लोकप्रियता और सार्वजनिक भूमिका के कारण कई बार यह मांग उठी है कि महिलाओं को भी शाही सिंहासन संभालने का अधिकार मिलना चाहिए।
जापान का मौजूदा शाही परिवार कानून (Imperial Household Law) केवल पुरुष वंशजों को सम्राट बनने की अनुमति देता है। इसी वजह से आइको, जो शाही परिवार की वरिष्ठ सदस्य हैं, वर्तमान नियमों के तहत सिंहासन की उत्तराधिकारी नहीं बन सकतीं।
जापान में घटती शाही आबादी और पुरुष उत्तराधिकारियों की कमी ने इस मुद्दे को और महत्वपूर्ण बना दिया है। सम्राट नारुहितो के बाद उत्तराधिकार की कतार में उनके छोटे भाई के बेटे प्रिंस हिसाहितो का नाम प्रमुखता से आता है।
हालांकि, महिलाओं को शाही उत्तराधिकार का अधिकार देने को लेकर जापान में समय-समय पर बहस होती रही है। समर्थकों का कहना है कि बदलते समाज में महिलाओं को भी समान अवसर मिलना चाहिए, जबकि कुछ लोग पारंपरिक पुरुष वंश व्यवस्था को बनाए रखने के पक्ष में हैं।
अगर भविष्य में कानून में व्यापक बदलाव होता है, तो जापान की सदियों पुरानी राजशाही व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन आ सकता है। फिलहाल प्रिंसेस आइको की भूमिका शाही परिवार की एक सक्रिय सदस्य के रूप में बनी हुई है, लेकिन सम्राट बनने के लिए कानूनी बदलाव जरूरी होगा।



