
भारत में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने करीब एक दशक बाद 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के ड्यूटी फ्री आयात की अनुमति दी है। यह आयात 31 अक्टूबर 2026 तक टैरिफ रेट कोटा के तहत किया जा सकेगा। सरकार का मकसद घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और त्योहारी सीजन से पहले कीमतों पर नियंत्रण रखना है।
इस फैसले के बाद पाकिस्तान की चीनी इंडस्ट्री को उम्मीद जगी थी कि वह भारत के बड़े बाजार में अपना अतिरिक्त स्टॉक बेच सकेगी। पाकिस्तान शुगर मिल्स एसोसिएशन से जुड़े एक वरिष्ठ सदस्य ने सरकार से भारत को अतिरिक्त चीनी निर्यात की संभावनाएं तलाशने की अपील भी की थी। पाकिस्तान की चीनी मिलों के पास 12 लाख टन से अधिक अतिरिक्त स्टॉक होने का दावा किया गया है।
हालांकि, भारत ने पाकिस्तान को अपनी चीनी आयात व्यवस्था में शामिल नहीं किया है। दोनों देशों के बीच मौजूदा तनाव और प्रत्यक्ष द्विपक्षीय व्यापार के ठप होने के कारण पाकिस्तान से चीनी आयात की संभावना फिलहाल बेहद सीमित है। इसलिए भारत के ड्यूटी फ्री आयात का फायदा पाकिस्तान की चीनी मिलों को मिलने की उम्मीद पर झटका लगा है।
भारत मुख्य रूप से अन्य अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से कच्ची चीनी मंगाने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक ब्राजील से आयात की संभावना अधिक है, हालांकि लंबी समुद्री दूरी के कारण नई खेपों का असर घरेलू बाजार में कुछ समय बाद दिखाई दे सकता है।
भारत में चीनी की कीमतों में हाल के महीनों में तेज बढ़ोतरी हुई है। कम उत्पादन और त्योहारी सीजन में बढ़ने वाली मांग के बीच सरकार ने आपूर्ति बढ़ाने के साथ-साथ बड़े उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की सीमा भी तय की है।
पाकिस्तान के लिए भारत का बाजार भौगोलिक रूप से बेहद आकर्षक हो सकता था, क्योंकि नजदीकी बाजार होने से परिवहन लागत कम रहती। लेकिन मौजूदा व्यापारिक और राजनीतिक परिस्थितियों में पाकिस्तान की चीनी इंडस्ट्री को इस अवसर का तत्काल लाभ मिलता नजर नहीं आ रहा है।



