Iran‑US Ceasefire: ट्रंप ने 90 मिनट पहले पलटा फैसला
ईरान पर हमले का खतरा कैसे टला?

ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव तब एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया था जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को “हॉर्मुज जलडमरूमध्य” खोलने और बातचीत के लिए ultimatum दिया था, जिसमें काफी कड़ी चेतावनी और हमले की धमकी भी शामिल थी। डेडलाइन सुबह 5.30 बजे तय थी और आख़िरी घड़ियों में पूरे विश्व का ध्यान इसी पर टिका हुआ था।
लेकिन जैसे‑जैसे समय आगे बढ़ा, अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में कुछ सकारात्मक संकेत मिले, खासकर ईरान की तरफ से हॉर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से खोलने की सहमति के बाद। इसी के आधार पर ट्रंप ने कठोर हमले की योजना पर रोक लगाई और दो हफ्तों के लिए युद्धविराम यानी सीजफायर को स्वीकार कर लिया।
डेडलाइन से महज 90 मिनट पहले यह निर्णय लिया जाना इस बात का संकेत था कि दोनों पक्षों की ओर से अंतिम समय तक कूटनीतिक रास्तों को आज़माया गया। युद्धविराम की रूपरेखा में ईरान ने अपने रक्षा संचालन स्थगित करने और सुरक्षित जलमार्ग की व्यवस्था का प्रस्ताव रखा, जबकि अमेरिका ने बातचीत और यातायात की सुरक्षा को लेकर सहमति दी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव इसीलिए संभव हुआ क्योंकि दोनों देशों को भारी तबाही और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर उसके असर का अंदेशा था, खासकर तेल आपूर्ति के सुरक्षित मार्ग हॉर्मुज के बिना। इसीलिए ट्रंप ने आख़िरी कदम पर हमले का निर्णय टालते हुए शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चुना, जिससे युद्धविराम पर सहमति बनी।



