चीन में बढ़ा ‘नो मैरिज, नो किड्स’ ट्रेंड, घटती जन्मदर बनी सरकार की बड़ी चिंता

China में युवाओं के बीच ‘नो मैरिज, नो किड्स’ यानी शादी न करने और बच्चे न पैदा करने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। यह सामाजिक बदलाव अब देश की जनसंख्या संरचना और आर्थिक विकास से जुड़ी गंभीर चिंता बन गया है। घटती जन्मदर और तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी को लेकर नीति निर्माताओं की चिंता लगातार बढ़ रही है।
Xi Jinping के नेतृत्व वाली सरकार पिछले कुछ वर्षों से जन्मदर बढ़ाने के लिए विभिन्न कदम उठा रही है। एक समय सख्त जनसंख्या नियंत्रण नीतियों के लिए चर्चित चीन अब विवाह और मातृत्व को प्रोत्साहित करने वाली नीतियों पर जोर दे रहा है। इसके बावजूद कई युवा आर्थिक दबाव, बढ़ती जीवन-यापन लागत, करियर प्राथमिकताओं और बदलती सामाजिक सोच के कारण विवाह और परिवार बढ़ाने से दूरी बना रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि घटती जन्मदर का असर भविष्य में श्रमबल, आर्थिक उत्पादन, सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था और पेंशन प्रणाली पर पड़ सकता है। यदि कामकाजी उम्र की आबादी लगातार कम होती है, तो देश की दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि जनसंख्या संकट को चीन की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक चुनौतियों में से एक माना जा रहा है।
हाल के वर्षों में चीन में विवाह पंजीकरण की संख्या में गिरावट और जन्मदर में लगातार कमी दर्ज की गई है। इसके चलते कई प्रांतों में परिवारों को आर्थिक प्रोत्साहन, बाल देखभाल सुविधाएं और अन्य सहायता योजनाएं शुरू की गई हैं। हालांकि इन उपायों का अपेक्षित प्रभाव अभी तक सीमित ही दिखाई दे रहा है।
जनसांख्यिकी विशेषज्ञों का कहना है कि केवल आर्थिक प्रोत्साहन पर्याप्त नहीं होंगे। युवाओं की जीवनशैली, रोजगार की अनिश्चितता, आवास की लागत और सामाजिक अपेक्षाओं जैसे व्यापक मुद्दों को भी संबोधित करना होगा। चीन के लिए आने वाले वर्षों में यह चुनौती केवल जनसंख्या का नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक संतुलन बनाए रखने का भी बड़ा प्रश्न बनी रह सकती है।



