US Mail-In Voting: ट्रंप प्रशासन पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, चुनाव से पहले बढ़ा विवाद

अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले मेल-इन वोटिंग का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी बहस के केंद्र में आ गया है। ट्रंप प्रशासन ने नए मेल-बैलेट नियमों को लागू कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। प्रशासन चाहता है कि निचली अदालत की रोक को हटाकर नियमों को लागू करने की अनुमति दी जाए।
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को मिडटर्म चुनाव होने हैं। कई राज्यों में मतपत्र भेजने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है या जल्द शुरू होने वाली है। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले नियमों में बदलाव को लेकर प्रशासन और राज्यों के बीच टकराव बढ़ गया है।
ट्रंप प्रशासन के प्रस्तावित नियमों के तहत मेल-इन बैलेट भेजने की प्रक्रिया में मतदाताओं से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी और विशेष पहचान व्यवस्था लागू की जानी है। बैलेट के लिफाफों पर यूनिक बारकोड जैसी शर्तें भी प्रस्तावित हैं। प्रशासन का कहना है कि इससे चुनाव प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकेगा।
वहीं, विरोध करने वाले राज्यों और मतदान अधिकार संगठनों का तर्क है कि इतने कम समय में नई व्यवस्था लागू करने से वैध मतदाताओं को परेशानी हो सकती है। उनका कहना है कि तकनीकी या डेटा संबंधी छोटी गलती के कारण भी मतपत्र की डिलीवरी प्रभावित हो सकती है।
इस विवाद में अमेरिकी डाक सेवा यानी USPS भी महत्वपूर्ण भूमिका में है। नई व्यवस्था लागू करने के लिए डाक सेवा को मतदाताओं से संबंधित डेटा और नए तकनीकी सिस्टम का इस्तेमाल करना होगा। सिस्टम की तैयारी और इसे चुनाव से पहले लागू करने की क्षमता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
निचली अदालत की ओर से लगाए गए प्रतिबंध के बाद ट्रंप प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की है। प्रशासन का कहना है कि जैसे-जैसे राज्य मेल-इन बैलेट भेजना शुरू करेंगे, नियमों को लेकर अनिश्चितता चुनाव प्रक्रिया में भ्रम पैदा कर सकती है।
इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट इस मामले से जुड़े एक चरण में ट्रंप प्रशासन के पक्ष में राहत दे चुका है। अगस्त में कोर्ट ने 6-3 के फैसले में कार्यकारी आदेश के कुछ हिस्सों को लागू करने का रास्ता साफ किया था। हालांकि इसके बाद USPS के नियमों को लेकर अलग कानूनी चुनौती सामने आई और निचली अदालत ने उनके क्रियान्वयन पर रोक लगा दी।
मेल-इन वोटिंग अमेरिका की चुनाव व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बड़ी संख्या में मतदाता चुनाव के दिन मतदान केंद्र पर जाने के बजाय डाक के जरिए अपना वोट डालते हैं। इसलिए मेल-बैलेट की प्रक्रिया में बदलाव का सीधा असर मतदाताओं और चुनाव प्रबंधन पर पड़ सकता है।
ट्रंप प्रशासन लंबे समय से मेल-इन वोटिंग के नियमों को लेकर सख्त रुख अपनाता रहा है। प्रशासन इसे चुनाव सुरक्षा से जोड़कर देखता है, जबकि विरोधी पक्ष का आरोप है कि नए नियम मतदान तक पहुंच को मुश्किल बना सकते हैं। इसी मतभेद के कारण मामला लगातार अदालतों में पहुंच रहा है।
अब सबकी नजर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के अगले फैसले पर है। कोर्ट यदि प्रशासन को राहत देता है तो मिडटर्म चुनाव से पहले मेल-इन वोटिंग की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव हो सकते हैं। वहीं रोक बरकरार रहने पर मौजूदा व्यवस्था के तहत चुनाव तैयारियां आगे बढ़ेंगी। फिलहाल यह मामला अमेरिकी चुनाव और संघीय बनाम राज्य अधिकारों के बीच चल रही बड़ी कानूनी लड़ाई बन चुका है।



