भारत में ऑनलाइन सट्टेबाजी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक बड़े मामले में अब गूगल और मेटा (Google & Meta) जैसी दिग्गज टेक कंपनियों की भी एंट्री हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इन कंपनियों को ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप्स के प्रचार और फंड ट्रांजैक्शन को लेकर नोटिस जारी किया है। ईडी ने गूगल और मेटा के प्रतिनिधियों को पूछताछ के लिए तलब किया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन प्लेटफॉर्म्स पर अवैध गतिविधियों को किस हद तक बढ़ावा मिला और क्या कंपनियां इससे अनजान थीं या जानबूझकर अनदेखी कर रही थीं।
ईडी के अनुसार, कुछ सट्टेबाजी ऐप्स ने गूगल और मेटा के डिजिटल विज्ञापन प्लेटफॉर्म्स के जरिए भारत में अपने प्रचार-प्रसार को बढ़ावा दिया और इस प्रक्रिया में कई करोड़ रुपये का अवैध लेन-देन हुआ। जांच एजेंसी यह जानना चाहती है कि क्या इन कंपनियों ने इन ऐप्स को विज्ञापन देने से पहले उनकी प्रमाणिकता की जांच की थी या नहीं। साथ ही, यह भी देखा जा रहा है कि कहीं इन कंपनियों की लापरवाही के चलते ही मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर अपराधों को अंजाम देने में मदद तो नहीं मिली।
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब जांच में सामने आया कि इन ऐप्स के जरिए बड़ी संख्या में भारतीय यूज़र्स को फंसाया गया और लाखों रुपये की ठगी हुई। गूगल और मेटा से यह जानकारी मांगी गई है कि किन-किन कंपनियों को उन्होंने विज्ञापन देने की अनुमति दी, भुगतान कैसे हुआ और क्या इन कंपनियों के बैंक अकाउंट्स और KYC प्रोसेस की जांच की गई थी।
टेक्नोलॉजी और कानून के इस टकराव ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बड़ी टेक कंपनियां सिर्फ विज्ञापन से कमाई पर ध्यान दे रही हैं, या वे प्लेटफॉर्म पर हो रही गतिविधियों की भी जिम्मेदारी ले रही हैं।
अब देखना यह होगा कि गूगल और मेटा ईडी को दिए गए जवाबों में कितनी पारदर्शिता दिखाते हैं, और क्या इस जांच के बाद देश में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर विज्ञापन नीति को और कड़ा किया जाएगा।



