अदाणी कॉपर प्लांट में अयस्क संकट गहराया: उत्पादन घटकर 10% से भी कम

अदाणी समूह के कॉपर प्लांट में इन दिनों अयस्क की भारी कमी के कारण उत्पादन गंभीर संकट से गुजर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्लांट को जितनी मात्रा में कॉपर अयस्क की आवश्यकता होती है, वर्तमान में उसका 10% से भी कम मिल पा रहा है। इस स्थिति ने न केवल उत्पादन क्षमता को लगभग ठप कर दिया है बल्कि कॉपर उत्पादों की सप्लाई पर भी बड़ा असर दिखना शुरू हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर कॉपर अयस्क की कमी, आयात में देरी और कुछ खनन क्षेत्रों में उत्पादन घटने के कारण उद्योग पर यह सीधा प्रभाव पड़ा है। अदाणी का यह प्लांट भारत में कॉपर उत्पादन का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है, और इसकी क्षमता में कमी का असर घरेलू बाजार पर भी धीरे-धीरे दिखाई देगा।
अयस्क की कमी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई चेन का असंतुलन बताया जा रहा है। कई देशों में खदानों से उत्पादन घटने, राजनीतिक अस्थिरता और शिपमेंट में बाधाओं के चलते कॉपर अयस्क की उपलब्धता प्रभावित हुई है। दूसरी ओर, भारत में कॉपर की मांग लगातार बढ़ रही है, क्योंकि बिजली, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में कॉपर की खपत तेजी से बढ़ी है। मांग और आपूर्ति में यह अंतर उद्योग को मुश्किल स्थिति में ले आया है। अदाणी समूह की ओर से वैकल्पिक स्रोतों की तलाश की जा रही है, लेकिन अभी तक पर्याप्त अयस्क उपलब्ध नहीं हो पाया है।
उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि आने वाले हफ्तों में अयस्क की सप्लाई सामान्य नहीं होती, तो प्लांट की उत्पादन क्षमता और गिर सकती है, जिससे कीमतों पर भी असर पड़ने की आशंका है। कॉपर की कमी से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, ट्रांसफार्मरों, केबल्स और अन्य औद्योगिक उत्पादों की लागत बढ़ सकती है। सरकार भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आयात प्रक्रियाओं को तेज करने के लिए संबंधित एजेंसियों के साथ काम कर रही है। अदाणी समूह ने भी बताया है कि वह सप्लाई चेन को स्थिर करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है, ताकि उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव को न्यूनतम रखा जा सके। कुल मिलाकर, अयस्क की वैश्विक कमी ने भारत के कॉपर उद्योग के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है, जिसका समाधान अगले कुछ महीनों में किए गए कदमों पर निर्भर करेगा।



