बढ़ते चीनी उत्पादन के बीच उद्योग ने सरकार से GST में राहत की अपील की

भारत में चीनी उत्पादन में इस साल 22% की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे शुगर इंडस्ट्री को उम्मीद है कि आगामी बजट में सरकार उनसे जुड़े वित्तीय बोझ, खासकर GST, में राहत देगी। देश में चीनी उत्पादन के बढ़ने का मतलब केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करना ही नहीं बल्कि निर्यात क्षमता को भी बढ़ाना है। इस बढ़ोतरी के कारण मिलों का संचालन बेहतर तरीके से हो रहा है, लेकिन उच्च GST दरों ने उद्योग पर दबाव बढ़ा दिया है।
शुगर इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों का कहना है कि वर्तमान समय में चीनी मिलों पर लागू GST दर उद्योग की आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल असर डाल रही है। उद्योग ने सुझाव दिया है कि अगर बजट में GST दरों में कमी की जाए तो यह न केवल मिलों की उत्पादन क्षमता बढ़ाएगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी सुधार लाएगा। भारतीय शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) ने सरकार को लिखित रूप से पत्र भेजकर कहा कि चीनी उत्पादन बढ़ने के बावजूद उच्च कर दरें उद्योग की स्थिरता के लिए चुनौती बन रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब उत्पादन 22% बढ़ रहा है, तो इस समय में कर राहत देना सही कदम होगा। इससे न केवल उद्योग की वित्तीय स्थिति सुधरेगी, बल्कि किसानों को भी उनकी उपज के उचित मूल्य मिलने में मदद मिलेगी। उद्योग ने यह भी कहा कि सरकार से कर राहत मिलने पर मिलें नई तकनीक और मशीनरी में निवेश कर सकती हैं, जिससे उत्पादकता और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा।
इसके अलावा, शुगर इंडस्ट्री ने कहा कि अगर GST में राहत नहीं दी गई, तो इससे उत्पादन लागत बढ़ सकती है, जिससे चीनी के दाम बढ़ने का खतरा है और उपभोक्ताओं पर दबाव पड़ेगा। सरकार द्वारा उचित कदम उठाने पर न केवल उद्योग को लाभ होगा, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
अंततः, इस मांग का उद्देश्य उद्योग को मजबूती देना और किसानों तथा उपभोक्ताओं दोनों के हितों को सुरक्षित रखना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बजट में GST में राहत मिलती है, तो यह शुगर इंडस्ट्री के लिए महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा और देश में चीनी उत्पादन व आपूर्ति श्रृंखला दोनों को स्थिरता मिलेगी।



