गोल्ड-सिल्वर में पैसा लगाने से पहले पढ़ें ये 7 बातें, जानिए क्या कहते हैं LIC MF के एमडी

वैश्विक अनिश्चितताओं, महंगाई और बाजार में उतार-चढ़ाव के दौर में निवेशक सुरक्षित विकल्पों की तलाश में रहते हैं। ऐसे समय में सोना और चांदी पारंपरिक रूप से भरोसेमंद माने जाते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या अभी निवेश करना सही है या इंतजार करना चाहिए? इसी तरह गोल्ड और सिल्वर ETF या SIP के जरिए निवेश कितना फायदेमंद हो सकता है? इन तमाम सवालों पर LIC म्यूचुअल फंड के प्रबंध निदेशक ने विस्तार से अपनी राय रखी है और निवेशकों को संतुलित रणनीति अपनाने की सलाह दी है।
उनका कहना है कि कीमती धातुएं पोर्टफोलियो में स्थिरता लाने का काम करती हैं। जब इक्विटी बाजार में दबाव होता है, तब सोना अक्सर बेहतर प्रदर्शन करता है। हालांकि, पूरा पैसा एक ही एसेट में लगाने के बजाय विविधता बनाए रखना जरूरी है। निवेशकों को अपनी जोखिम लेने की क्षमता और निवेश अवधि के हिसाब से फैसला करना चाहिए।
ETF के बारे में उन्होंने बताया कि यह सोना-चांदी में निवेश का पारदर्शी और आसान तरीका है। इसमें शुद्धता की चिंता नहीं होती और इसे शेयर बाजार की तरह खरीदा-बेचा जा सकता है। वहीं SIP के जरिए धीरे-धीरे निवेश करने से कीमतों में उतार-चढ़ाव का औसत निकल जाता है, जिससे लंबी अवधि में बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। खासकर छोटे निवेशकों के लिए यह तरीका काफी उपयोगी माना जाता है।
एमडी ने यह भी स्पष्ट किया कि निवेश का समय तय करने की कोशिश में अक्सर लोग मौके गंवा देते हैं। इसलिए नियमित निवेश की आदत ज्यादा महत्वपूर्ण है। अगर किसी का लक्ष्य लंबी अवधि का है, तो बाजार की छोटी-मोटी गिरावट से घबराने की जरूरत नहीं। साथ ही, पोर्टफोलियो का एक हिस्सा ही गोल्ड या सिल्वर में रखना समझदारी है।
कुल मिलाकर संदेश यही है कि सोना-चांदी सुरक्षा और संतुलन देने वाले एसेट हैं, लेकिन इन्हें समझदारी से और योजना बनाकर शामिल करना चाहिए। सही अनुपात और अनुशासित निवेश रणनीति ही भविष्य में बेहतर रिटर्न दिला सकती है।



