4–8 हफ्ते बंद रहा Hormuz स्ट्रेट तो बढ़ेगी तेल की कीमत, दुनिया भर में महंगाई की आशंका

मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच दुनिया की नजरें इस समय Strait of Hormuz पर टिकी हुई हैं। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह अहम समुद्री मार्ग 4 से 8 हफ्तों तक बंद रहा, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल ट्रांजिट मार्ग माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। मध्य पूर्व के बड़े तेल उत्पादक देश जैसे Saudi Arabia, Iraq, Kuwait और United Arab Emirates इसी मार्ग के जरिए अपना तेल दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भेजते हैं। ऐसे में अगर इस मार्ग पर किसी कारण से शिपिंग रुक जाती है या सुरक्षा खतरे बढ़ जाते हैं, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती हैं तो इसका असर केवल पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया भर में महंगाई का दबाव भी तेजी से बढ़ सकता है। तेल महंगा होने से परिवहन, बिजली उत्पादन, खाद्य आपूर्ति और औद्योगिक उत्पादन की लागत बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है। खासकर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल से देश में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने और महंगाई दर में वृद्धि की आशंका बढ़ जाती है।
ऊर्जा बाजार के विश्लेषकों का कहना है कि अगर क्षेत्रीय तनाव बढ़ता है और शिपिंग कंपनियां सुरक्षा कारणों से इस मार्ग से गुजरने से बचने लगती हैं, तो तेल आपूर्ति में भारी व्यवधान पैदा हो सकता है। इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा, क्योंकि कई देशों की आर्थिक वृद्धि ऊर्जा की स्थिर आपूर्ति पर निर्भर करती है। वहीं अंतरराष्ट्रीय संगठनों और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की कोशिश है कि स्थिति को नियंत्रण में रखा जाए और तेल आपूर्ति में किसी बड़े व्यवधान को रोका जा सके। फिलहाल बाजार की नजरें मिडिल ईस्ट की स्थिति और समुद्री सुरक्षा पर टिकी हुई हैं, क्योंकि आने वाले हफ्तों में यही तय करेगा कि वैश्विक तेल बाजार स्थिर रहेगा या फिर दुनिया को एक नई महंगाई लहर का सामना करना पड़ेगा।



