AIS-TIS की वजह से क्यों भरना पड़ रहा दोबारा ITR?

आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने के दौरान अब केवल फॉर्म भरना ही पर्याप्त नहीं रह गया है। टैक्स विभाग की डिजिटल निगरानी व्यवस्था के तहत Annual Information Statement (AIS) और Tax Information Summary (TIS) का महत्व काफी बढ़ गया है। यदि टैक्सपेयर द्वारा ITR में दी गई जानकारी और AIS/TIS में दर्ज आंकड़ों के बीच अंतर पाया जाता है, तो बाद में संशोधित (Revised) रिटर्न दाखिल करने की जरूरत पड़ सकती है।
AIS एक विस्तृत दस्तावेज होता है, जिसमें बैंक ब्याज, शेयर लेनदेन, डिविडेंड, टीडीएस, उच्च मूल्य के वित्तीय लेनदेन और अन्य वित्तीय गतिविधियों की जानकारी दर्ज रहती है। वहीं TIS इन्हीं आंकड़ों का संक्षिप्त सार प्रस्तुत करता है, जिसका उपयोग करदाता और आयकर विभाग दोनों कर निर्धारण के लिए करते हैं।
कई बार बैंक, म्यूचुअल फंड, नियोक्ता या अन्य रिपोर्टिंग संस्थाएं देर से जानकारी अपडेट करती हैं। ऐसे में टैक्सपेयर यदि AIS और TIS की जांच किए बिना ITR दाखिल कर देता है, तो बाद में नए आंकड़े दिखाई देने पर रिटर्न में अंतर पैदा हो सकता है। ऐसी स्थिति में नोटिस या स्पष्टीकरण से बचने के लिए संशोधित ITR भरना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि ITR दाखिल करने से पहले AIS और TIS का मिलान अवश्य करें। यदि किसी एंट्री में त्रुटि दिखाई दे तो उपलब्ध फीडबैक सुविधा के माध्यम से उसे रिपोर्ट करें। सही दस्तावेजों और अद्यतन वित्तीय जानकारी के आधार पर रिटर्न दाखिल करने से संशोधित ITR की आवश्यकता कम हो सकती है और टैक्स प्रक्रिया अधिक सुगम बन सकती है।



