तेल की कीमतों में क्यों नहीं लगी आग? IMF ने बताए 3 बड़े शॉक एब्जॉर्बर्स

दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में वैसी तेजी नहीं देखने को मिली, जिसकी आशंका जताई जा रही थी। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार, इसके पीछे तीन बड़े शॉक एब्जॉर्बर्स यानी ऐसे कारक रहे, जिन्होंने तेल बाजार पर दबाव को कम किया।
पहला कारण रहा वैश्विक तेल उत्पादन में पर्याप्त क्षमता का बने रहना। कुछ प्रमुख तेल उत्पादक देशों के पास अतिरिक्त उत्पादन क्षमता मौजूद रही, जिससे सप्लाई में अचानक बड़ी कमी नहीं आई और कीमतों पर नियंत्रण बना रहा।
दूसरा अहम फैक्टर अमेरिका समेत कुछ देशों में बढ़ा हुआ तेल उत्पादन रहा। घरेलू उत्पादन और बेहतर सप्लाई व्यवस्था ने वैश्विक बाजार में उपलब्धता बनाए रखने में मदद की।
तीसरा कारण कमजोर वैश्विक मांग रही। कई अर्थव्यवस्थाओं में विकास की रफ्तार धीमी रहने से तेल की खपत में अपेक्षित तेजी नहीं आई, जिससे मांग का दबाव सीमित रहा।
IMF का कहना है कि ऊर्जा बाजार कई बार सप्लाई में व्यवधान, राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं से प्रभावित होते हैं, लेकिन उपलब्ध स्टॉक, उत्पादन क्षमता और मांग की स्थिति कीमतों को संतुलित करने में भूमिका निभाते हैं।
हालांकि, तेल बाजार में जोखिम अभी भी बने हुए हैं। किसी बड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रम, उत्पादन में अचानक कमी या सप्लाई रूट प्रभावित होने की स्थिति में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है।
भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतें बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनका असर महंगाई, परिवहन लागत और अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों पर पड़ता है।



