‘अमेरिका भरोसे के लायक नहीं’, चीन से कारोबार बढ़ाने की सलाह पर मचा बवाल

अमेरिका और चीन के साथ भारत के व्यापारिक रिश्तों को लेकर एक टिप्पणी ने नई बहस छेड़ दी है। पीएम मोदी के करीबी माने जाने वाले आर्थिक मामलों के विशेषज्ञों की ओर से यह सुझाव सामने आया कि भारत को वैश्विक कारोबार में सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ अपने हितों को ध्यान में रखते हुए संबंध मजबूत करने चाहिए।
इस बहस का केंद्र अमेरिका पर भरोसे और चीन के साथ व्यापार बढ़ाने का मुद्दा है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता जोखिम बढ़ा सकती है, इसलिए भारत को विविध व्यापारिक साझेदारों के साथ संतुलन बनाकर चलना चाहिए।
चीन दुनिया का बड़ा विनिर्माण केंद्र है और भारत कई क्षेत्रों में चीनी आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ा हुआ है। इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, सोलर उपकरण और कई औद्योगिक क्षेत्रों में चीन के साथ व्यापार का महत्व बना हुआ है।
वहीं, अमेरिका भारत का एक प्रमुख रणनीतिक और व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच रक्षा, तकनीक, निवेश और सेवाओं के क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की चुनौती यह है कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा, घरेलू उद्योगों की जरूरत और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखे। चीन के साथ व्यापार बढ़ाने के साथ-साथ घरेलू उत्पादन क्षमता मजबूत करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
वैश्विक राजनीति में बढ़ते तनाव के बीच भारत की विदेश और व्यापार नीति ‘रणनीतिक संतुलन’ पर केंद्रित रही है, जिसमें अलग-अलग देशों के साथ आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाता है।



