
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना ने महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए तत्काल कानूनी सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि किसी घटना के बाद महिलाओं को कानूनी मदद के लिए लंबा इंतजार नहीं करना चाहिए। इसके लिए पुलिस थानों और अस्पतालों में कानूनी सहायता की व्यवस्था को मजबूत किया जाना जरूरी है।
जस्टिस नागरत्ना ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सरकारी अस्पतालों और पुलिस थानों के साथ बेहतर तालमेल बनाने की आवश्यकता बताई। उनका कहना है कि जरूरत पड़ने पर महिलाओं को तुरंत सहायता देने के लिए पैरालीगल वालंटियर्स भी कम समय में उपलब्ध होने चाहिए।
उन्होंने कानूनी सहायता की प्रभावशीलता का आकलन केवल लाभार्थियों की संख्या से नहीं, बल्कि उन्हें मिले वास्तविक परिणामों के आधार पर करने की बात कही। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच 4,14,795 महिलाओं ने कानूनी सहायता का लाभ लिया।
जस्टिस नागरत्ना ने महिलाओं से जुड़े साइबर अपराधों में बढ़ोतरी पर भी चिंता जताई। उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया के दौरान पीड़िताओं को दोबारा मानसिक परेशानी से बचाने और न्यायिक अधिकारियों को लैंगिक पूर्वाग्रहों व रूढ़ियों के प्रति संवेदनशील बनाने की जरूरत बताई।
उन्होंने अंतरिम पीड़ित मुआवजा भी जल्द उपलब्ध कराने की वकालत की, ताकि पीड़ितों को चिकित्सा और कानूनी खर्चों में मदद मिल सके। उनके अनुसार महिलाओं के लिए न्याय व्यवस्था को अधिक सुलभ, त्वरित और संवेदनशील बनाना जरूरी है।



