
भारतीय रुपये में लगातार कमजोरी के बीच चीनी युआन ने वैश्विक मुद्रा बाजार में बड़ा रिकॉर्ड बना दिया है। डॉलर के मुकाबले युआन तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जिससे चीन की आर्थिक रणनीति एक बार फिर चर्चा में आ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन ने निर्यात, विदेशी निवेश और केंद्रीय बैंक की सख्त मुद्रा नीति के जरिए अपनी करेंसी को मजबूती दी है।
चीन की सरकार और पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने पिछले कुछ समय में डॉलर पर निर्भरता कम करने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में युआन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने, विदेशी निवेशकों का भरोसा मजबूत करने और बाजार में नियंत्रित हस्तक्षेप जैसी नीतियों ने युआन को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा चीन की मजबूत मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था ने भी मुद्रा को सहारा दिया है।
दूसरी ओर भारतीय रुपये पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, विदेशी निवेश निकासी और वैश्विक आर्थिक दबाव का असर देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर डॉलर लगातार मजबूत बना रहता है तो रुपये पर दबाव और बढ़ सकता है। वहीं चीन की मुद्रा में आई मजबूती एशियाई बाजारों में नई आर्थिक बहस को जन्म दे रही है।



