Gold Loan पर सरकार की बड़ी नजर, बैंकों से मांगा पूरा ब्योरा; क्या है मोदी सरकार का प्लान?

केंद्र सरकार ने देश के बैंकों से गोल्ड लोन और गोल्ड मेटल लोन (GML) से जुड़ा विस्तृत ब्योरा मांगा है। वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) ने बैंकों से वर्ष 2023 से अब तक जारी किए गए गोल्ड लोन, गोल्ड मेटल लोन, ग्राहकों की संख्या, गिरवी रखे गए सोने की मात्रा और पोर्टफोलियो के आकार से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है।
इस कदम के बाद बाजार और बैंकिंग क्षेत्र में यह चर्चा तेज हो गई है कि सरकार सोने से जुड़े वित्तीय उत्पादों और गोल्ड लेंडिंग सेक्टर में कुछ नए सुधार या नीतिगत कदमों पर विचार कर सकती है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक किसी नई योजना या नियम की औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का फोकस सोने को निष्क्रिय संपत्ति के बजाय वित्तीय परिसंपत्ति के रूप में अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग करने पर हो सकता है। देश में बड़ी मात्रा में घरेलू सोना मौजूद है और सरकार लंबे समय से गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम तथा गोल्ड मेटल लोन जैसी व्यवस्थाओं को बढ़ावा देने का प्रयास करती रही है।
हाल के वर्षों में गोल्ड लोन का बाजार तेजी से बढ़ा है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार गोल्ड लोन पोर्टफोलियो में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे यह बैंकिंग और एनबीएफसी क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
इस बीच सरकार और RBI पहले भी यह स्पष्ट कर चुके हैं कि छोटे उधारकर्ताओं की जरूरतों को ध्यान में रखा जाएगा। गोल्ड लोन नियमों में बदलाव के दौरान भी यह सुझाव दिया गया था कि छोटे कर्जदारों पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ना चाहिए।
फिलहाल वित्त मंत्रालय द्वारा डेटा संग्रह को एक समीक्षा प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में इस जानकारी के आधार पर गोल्ड लोन, गोल्ड मेटल लोन और सोने से जुड़ी वित्तीय योजनाओं के लिए नई नीतियां या सुधारात्मक कदम सामने आ सकते हैं।



