बांग्लादेश से प्रतिस्पर्धा, अब भीषण गर्मी का वार; संकट में भारत की गारमेंट इंडस्ट्री

भारत की गारमेंट और परिधान उद्योग इस समय कई मोर्चों पर दबाव झेल रही है। उद्योग पहले से ही बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले लागत, उत्पादकता और निर्यात प्रतिस्पर्धा की चुनौतियों का सामना कर रहा था। अब देश के कई हिस्सों में पड़ रही भीषण गर्मी और हीटवेव ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
हालिया रिपोर्टों के अनुसार अत्यधिक तापमान का असर सीधे उत्पादन इकाइयों पर पड़ रहा है। फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिकों की कार्यक्षमता घट रही है, अनुपस्थिति बढ़ रही है और उत्पादन की गति धीमी पड़ रही है। कुछ अध्ययनों में उत्पादकता में 10 प्रतिशत तक गिरावट का अनुमान लगाया गया है, जिससे वैश्विक ब्रांडों के लिए काम करने वाली इकाइयों पर अतिरिक्त दबाव बना है।
उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि भारत पहले ही बांग्लादेश से प्रतिस्पर्धा में कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। हालांकि दूसरी ओर कुछ विश्लेषण यह भी बताते हैं कि भारत की एकीकृत सप्लाई चेन और संभावित व्यापार समझौतों के कारण उसकी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति कुछ क्षेत्रों में मजबूत हुई है। इसके बावजूद लागत, श्रम उत्पादकता और जलवायु संबंधी चुनौतियां उद्योग के लिए बड़ी चिंता बनी हुई हैं।
दिल्ली-एनसीआर समेत कई प्रमुख टेक्सटाइल और परिधान उत्पादन क्षेत्रों में हीटवेव का असर देखा गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ इलाकों में उत्पादन क्षमता में 15-20 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है और बिजली आपूर्ति तथा लॉजिस्टिक्स से जुड़ी समस्याओं ने निर्यात शिपमेंट को भी प्रभावित किया है।
इसके साथ ही उद्योग को बढ़ती कच्चे माल की लागत, वैश्विक मांग में सुस्ती और सप्लाई चेन चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। कई उद्योग संगठनों ने सरकार से राहत उपायों, लागत कम करने और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए नीति समर्थन की मांग की है।
हालांकि चुनौतियों के बीच भारतीय टेक्सटाइल और गारमेंट क्षेत्र ने हाल के वित्तीय वर्ष में निर्यात वृद्धि भी दर्ज की है, जिससे संकेत मिलता है कि उद्योग में दीर्घकालिक संभावनाएं अभी भी मजबूत हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु-अनुकूल कार्यस्थल, तकनीकी निवेश और नीति समर्थन के जरिए उद्योग इस संकट से उबर सकता है।



