
इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर, रक्षा उपकरण, मोबाइल फोन और अक्षय ऊर्जा तकनीकों में इस्तेमाल होने वाले रेयर अर्थ खनिजों को लेकर वैश्विक प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। ऐसे में भारत ने अपनी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए रूस की ओर कदम बढ़ाया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत और रूस के बीच रेयर अर्थ खनिजों के अन्वेषण और विकास को लेकर बातचीत चल रही है, जिसमें रूस की एक बड़ी खनन कंपनी भी शामिल है। इस पहल को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वैश्विक रेयर अर्थ बाजार पर लंबे समय से चीन का दबदबा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सहयोग आगे बढ़ता है तो भारत को महत्वपूर्ण खनिजों के वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध हो सकते हैं। वर्तमान में इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियां, विंड टर्बाइन, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा प्रणालियां और कई हाई-टेक उद्योग रेयर अर्थ तत्वों पर निर्भर हैं। ऐसे में आपूर्ति का विविधीकरण भारत के औद्योगिक और रणनीतिक हितों के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है।
भारत सरकार पहले से ही क्रिटिकल मिनरल्स मिशन, विदेशी खनन परिसंपत्तियों में निवेश और घरेलू खनिज खोज को बढ़ावा देने जैसे कदम उठा रही है। रूस के साथ संभावित साझेदारी इन प्रयासों को और मजबूती दे सकती है। इससे न केवल भविष्य की औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति भी मजबूत हो सकती है।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले वर्षों में रेयर अर्थ और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की मांग कई गुना बढ़ने की संभावना है। इसलिए जिन देशों के पास इन संसाधनों तक सुरक्षित पहुंच होगी, उन्हें तकनीकी और आर्थिक प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिल सकती है। ऐसे में रूस के साथ सहयोग की दिशा में भारत की पहल को दीर्घकालिक रणनीतिक निवेश के रूप में देखा जा रहा है, जो ऊर्जा परिवर्तन, रक्षा उत्पादन और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।



