शेयर बाजार बंद होने पर नितिन कामत का तीखा बयान, बोले– ऐसे फैसलों से भारत की छवि होती है कमजोर

BMC चुनाव के चलते शेयर बाजार बंद किए जाने के फैसले पर देश के जाने-माने निवेशक और ज़ेरोधा के सह-संस्थापक नितिन कामत ने कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने इस फैसले को अव्यावहारिक बताते हुए कहा कि इसी तरह के कदमों की वजह से वैश्विक निवेशक भारत को गंभीरता से नहीं लेते। नितिन कामत ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए सवाल उठाया कि जब आज के दौर में तकनीक और डिजिटल व्यवस्था इतनी मजबूत है, तब स्थानीय चुनावों के कारण पूरे शेयर बाजार को बंद करना कितना तर्कसंगत है।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और वैश्विक निवेशकों की नजर लगातार भारतीय बाजार पर बनी रहती है। ऐसे में अचानक बाजार बंद होने से न सिर्फ निवेशकों को असुविधा होती है, बल्कि देश की प्रोफेशनल और संस्थागत छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। नितिन कामत के अनुसार, विकसित देशों में चुनाव या अन्य स्थानीय गतिविधियों के बावजूद वित्तीय बाजार सामान्य रूप से चलते रहते हैं, जबकि भारत में अभी भी पुराने तौर-तरीकों का पालन किया जाता है।
नितिन कामत ने यह भी कहा कि शेयर बाजार करोड़ों निवेशकों की आजीविका और भविष्य से जुड़ा हुआ है। एक दिन का बाजार बंद होना छोटे निवेशकों, ट्रेडर्स और ब्रोकरेज फर्मों के लिए आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और अन्य आवश्यक सेवाएं चुनाव के दिन भी चालू रहती हैं, तो शेयर बाजार को बंद करने की क्या मजबूरी है।
उनकी इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। कई निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों ने नितिन कामत के विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि भारत को वैश्विक मानकों के अनुरूप अपनी नीतियों में बदलाव करना चाहिए। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कारणों से यह फैसला जरूरी होता है।
कुल मिलाकर, नितिन कामत का यह बयान भारतीय वित्तीय प्रणाली में सुधार और आधुनिक सोच की जरूरत की ओर इशारा करता है। उनका मानना है कि यदि भारत को सच में एक ग्लोबल फाइनेंशियल हब बनना है, तो ऐसे छोटे लेकिन महत्वपूर्ण फैसलों पर गंभीरता से विचार करना होगा, ताकि अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा और मजबूत हो सके।



