IGI नहीं, ये है भारत का सबसे बड़ा एयरपोर्ट | ₹2478 करोड़ की लागत से बना शानदार हवाई अड्डा

अक्सर जब देश के सबसे बड़े एयरपोर्ट की बात होती है तो लोगों के मन में सबसे पहले दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (IGI Airport) आता है, लेकिन अब भारत में एक और ऐसा हवाई अड्डा बनकर तैयार हो गया है जो आकार और सुविधाओं के मामले में IGI को भी पीछे छोड़ने वाला है। यह एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले के जेवर में बन रहा नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (Noida International Airport) है। इसे बनाने में लगभग ₹2478 करोड़ रुपये की लागत आई है और इसे देश का सबसे बड़ा व अत्याधुनिक एयरपोर्ट कहा जा रहा है।
यह हवाई अड्डा 5,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है, जो इसे न केवल उत्तर भारत बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल करता है। इसका निर्माण स्विट्जरलैंड की कंपनी Zurich Airport International AG द्वारा किया जा रहा है, जो दुनिया के कई प्रमुख एयरपोर्ट्स के निर्माण में अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती है। इस परियोजना का संचालन यमुनाएक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) के सहयोग से किया जा रहा है।
नोएडा एयरपोर्ट का पहला चरण जल्द ही पूरा होने वाला है और इसके बाद यहां सालाना 1.2 करोड़ से अधिक यात्रियों की आवाजाही की क्षमता होगी। आने वाले वर्षों में इस एयरपोर्ट को पांच रनवे और 12 करोड़ यात्रियों की वार्षिक क्षमता के साथ विकसित करने की योजना है। इसके निर्माण में आधुनिक तकनीकों, पर्यावरण-संतुलन और ऊर्जा-संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। एयरपोर्ट को “कार्बन न्यूट्रल” बनाने का लक्ष्य भी रखा गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों ने इस परियोजना को उत्तर भारत के विकास की “नई उड़ान” बताया है। उनका कहना है कि जेवर एयरपोर्ट न केवल दिल्ली-एनसीआर के एयर ट्रैफिक को कम करेगा बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश को औद्योगिक और निवेश के नए अवसर प्रदान करेगा।
यह हवाई अड्डा तैयार होने के बाद भारत की वैश्विक कनेक्टिविटी को नई दिशा देगा और विदेशी निवेश को आकर्षित करेगा। इसके साथ ही लाखों लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
संक्षेप में कहा जाए तो नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा सिर्फ एक ट्रांसपोर्ट हब नहीं बल्कि भारत के “नए आत्मनिर्भर युग” का प्रतीक बनने जा रहा है — जो आने वाले वर्षों में देश के विमानन इतिहास का गौरवशाली अध्याय साबित होगा।



